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दुनिया

चीन ने दलाई लामा के गांव को फिर से बनाया

चीन ने बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के गांव को फिर से बनाया है. वहां रहने वाले लोगों को नए घर बनाकर दिए गए हैं. दलाई लामा के रिश्तेदारों को भी नए घर मिले हैं. हालांकि इन लोगों को दलाई लामा की वापसी की उम्मीद कम ही है.

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दलाई लामा

किंगहाई-तिब्बत पठार पर स्थित होंग आई गांव में दलाई लामा का जन्म हुआ. देश की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने खबर दी है कि इस गांव के सभी 54 घरों को फिर से बनाया गया है. इनमें गोंगपो ताशी का घर भी शामिल है. ताशी का काम अपने अंकल तेनजिन ग्यास्तो यानी दलाई लामा के घर की साज संभाल करना है.

63 साल के गोंगपो दलाई लामा से दो बार मिले हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें भारत आना पड़ा क्योंकि दलाई लामा 1959 से भारत में निर्वासित जिंदगी बिता रहे हैं. गोंगपो कहते हैं, "अगर किसी दिन मेरी उनसे बात हुई तो मैं उन्हें बताऊंगा कि गांव में क्या क्या बदलाव हुए हैं." गोंगपो गांव के पैसे वाले लोगों में हैं लेकिन उन्हें भी सरकार ने नया घर बनाने के लिए पैसा दिया. लेकिन गोंगपो को नहीं लगता कि उनके अंकल कभी उनका नया घर देख पाएंगे. वह कहते हैं, "क्या मैं उनकी वापसी का इंतजार कर रहा हूं? अगर वह लौट आएं तो सारी समस्याएं हल हो जाएंगी."

चीनी मीडिया में दलाई लामा के बारे में कोई खबर बिना उनकी आलोचना के छपी हो, ऐसा बहुत कम होता है. इस खबर के आने से दो ही दिन पहले दलाई लामा ने हंगरी में कहा कि वह चीन के पासपोर्ट पर तिब्बत लौटेंगे. उन्होंने कहा, "मैं आशावादी हूं. मुझे लगता है कि मैं चीनी पासपोर्ट पर तिब्बत लौटूंगा. एक ऐसा हल खोजना ही चाहिए जो तिब्बत और चीन दोनों के लिए अच्छा हो."

दलाई लामा तेनजिन के नाम से 1935 में किंगहाई राज्य में जन्मे. उस साल यहां बड़ा भूकंप आया जिसमें हजारों लोगों की जानें गईं. 1959 में जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया तो दलाई लामा भारत आ गए.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः महेश झा

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