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दुनिया

चीन ने कहा, अमेरिका को चुनौती देना इरादा नहीं

चीन ने साफ किया है कि स्टील्थ फाइटर जेट की परीक्षण उड़ान अमेरिका के लिए खतरा नहीं मानी जानी चाहिए. उसका प्रशांत महासागर में अमेरिकी सैन्य शक्ति को चुनौती देने का इरादा नहीं. अमेरिकी एडमिरल माइक मुलेन के बयान पर जवाब.

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चीन ने मंगलवार को पुष्टि की कि उसने जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान का पहला परीक्षण किया. यह परीक्षण ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव को कम करने चीन पहुंचे थे.

चीनी सेना के आधुनिकीकरण के तहत यह परीक्षण हुआ. वह नए एयरक्राफ्ट कैरियर, सैटेलाइट रोधी मिसाइलें और दूसरी अति आधुनिक प्रणालियां विकसित करना चाहता है. चीन की योजना से पड़ोसी देशों और अमेरिका के कान खड़े हो गए. एक दक्षिण कोरिया जानकार प्रोफेसर आह्न यिन्हे का कहना है, "चीन दिखाना चाहता है कि उसकी रक्षा प्रणाली बहुत आधुनिक है. वहीं अमेरिका सवाल कर रहा है कि कहीं चीन का लक्ष्य अमेरिका तो नहीं..जिसे चीन बताना चाहता है कि वह हाई टैक हथियारों से लैस है."

अमेरिका और चीन के बीच पिछले सालों में लगातार विवाद होता रहा है. 2001 में अमेरिका के निगरानी विमान को चीन की वायुसेना के विमान ने गिरा दिया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध खराब हो गए थे.

चीन हमेशा से कहता रहा है कि उसकी सेना का आधुनिकीकरण देश की रक्षा, विकास और रुचि के लिए अच्छा है. यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अच्छा साबित होगा. सेना के पुराने हथियार भी नए किए जा सकते हैं.

चुनौती का इरादा नहीं

चीन के सरकारी अखबार पीपल्स डेली में रियर एडमिरल यांग यी के मुताबिक, "पीपल्स लिबरेशन आर्मी की क्षमता ही नहीं है और इससे भी ज्यादा उसका अमेरिका की सीमा और दुनिया भर में उसकी सैन्य श्रेष्ठता को कोई चुनौती नहीं देना चाहता. न ही चीन क्षेत्र में कोई सैनिक आधिपत्य जमाना का इरादा रखता है."

वॉशिंगटन में अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन ने कहा कि उन्हें चीन के इस कदम से बिलकुल आश्चर्य नहीं हुआ है. एडमिरल मुलेन कहते हैं कि चीन लंबे समय से उच्च तकनीक क्षमता को बढ़ाने के लिए भारी निवेश कर रहा है.

उधर चीन दौरे में अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा, "मुझे लगता है कि बातचीत सफल रही और सेनाओं के बीच संबंध को अगले स्तर तक ले जाया जा सकता है."

रिपोर्टः रॉयटर्स/आभा एम

संपादनः ए कुमार

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