चीन चाहता है भारत का सहयोग | विज्ञान | DW | 02.12.2013
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विज्ञान

चीन चाहता है भारत का सहयोग

चांद पर अपना पहला मानवरहित अंतरिक्ष यान भेजने के बाद चीन ने अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भारत से हाथ मिलाने की इच्छा जताई है.

एक दिन पहले ही भारत के मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा को छोड़ दिया और मंगल के लिए 300 दिन के सफर पर रवाना हो गया.

चीन ने रविवार रात करीब 56.4 मीटर ऊंचे लॉन्ग मार्च-3बी रॉकेट के जरिये ‘चांग ई-3' प्रोब को धरती की कक्षा में प्रक्षेपित किया. ‘चांग ई-3' को शीचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अंतरिक्ष में भेजा गया.

पिछले दिनों भारत के मंगलयान का अंतरिक्ष में भेजा और अब तक यह सफल रहा है. चीन के लॉन्च के एक दिन पहले ही भारत के मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा सफलतापूर्वक छोड़ी. अब वह 300 दिन की यात्रा करने के बाद मंगल की कक्षा में दाखिल होगा और वहां से उसका असली काम शुरू होगा.

मंगलयान की अब तक की सफलता के बाद भारत अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों के उस समूह में शामिल हो गया है जिसको मंगल मिशन में सफलता मिली है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिंहुआ के अुसार चीनी अंतरिक्ष विज्ञानी भारत और साथ अन्य देशों के साथ भी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए हाथ मिलाना चाहते हैं. चीन के मून मिशन के उप कमांडर ली बेंयेंग ने कहा कि चीन के अंतरिक्ष अंवेषण का मकसद किसी तरह की प्रतिस्पर्धा नहीं है.

शिंहुआ के अनुसार, "हम अपने मून मिशन को लेकर स्पष्ट हैं. अन्य देशों से किसी भी तरह के सहयोग का स्वागत है. हमें उम्मीद है कि हम अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जरिए मानव विकास के लिए अंतरिक्ष के संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे."

चांग ई-3 के चांद की सतह पर मध्य दिसंबर में उतरने की उम्मीद है. यह चीन का पहला अंतरिक्ष यान होगा जो धरती के बाहर किसी सतह पर उतरेगा.

इसके साथ एक टेलिस्कोप और एक रोबोटिक रोवर भी है, जो चंद्रमा की सतह पर उतर कर वहां शोध और अनुसंधान में मदद करेगा. शीचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर के निदेशक यांग येंगयोंग ने बताया कि प्रोब कक्षा में प्रवेश कर चुका है. अपनी टीम को इस सफलता की बधाई देते हुए उन्होंने कहा, "मैं अब घोषणा करता हूं कि प्रक्षेपण सफल रहा."

इस कार्यक्रम के प्रमुख डिजायनर वू वाइरेन ने कहा प्रोब का चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरना सबसे कठिन चरण है. उन्होंने कहा कि यह चीन के लिए चन्द्रमा की इतनी करीब से अध्ययन करने की दिशा में बहुत बड़ी कामयाबी होगी.

एसएफ/आईबी (पीटीआई, रॉयटर्स)

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