चीन के साथ रिश्ते बढ़ाएंगे पुतिन | दुनिया | DW | 20.05.2014
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दुनिया

चीन के साथ रिश्ते बढ़ाएंगे पुतिन

रूस चीन से निकटता चाहता है. यूक्रेन संकट की वजह से राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन एशिया की ओर रुख कर रहे हैं. दो दिन के दौरे पर वे चीन के साथ गैस की बिक्री का बड़ा समझौता करेंगे. इसके साथ वे यूरोपीय संघ पर दबाव डाल सकते हैं.

अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ यूक्रेन विवाद के बीच रूस चीन के साथ अपना सहयोग बढ़ रहा है. चीन जाने से पहले रूसी समाचार एजेंसी शिनहुआ को दिए गए इंटरव्यू में पुतिन ने कहा है कि रूस और चीन के रिश्ते इस समय चरम पर हैं. "चीन के साथ रिश्तों को बढ़ाना निसंदेह रूस की राजनयिक प्राथमिकता है." इस दौरे पर कई समझौतों के साथ मॉस्को बीजिंग के साथ अपने संबंधों पर जोर देगा. चीन को गैस की आपूर्ति की वार्ता पूरी होने वाली है और दौरे के समय इस पर हस्ताक्षर होंगे. सालों से दोनों देशों के बीच गैस की कीमत को लेकर विवाद था.

पुतिन का कहना है कि रूस के लिए यह समझौता उसके गैस बाजार का प्रसार है. चीन विशेषज्ञ मोरित्स रूडोल्फ के अनुसार रूस मुख्य रूप से यूक्रेन विवाद के कारण चीन के साथ अपने संबंधों को गहरा बनाना चाहता है. वे कहते हैं, "पश्चिमी देशों की प्रतिबंधों की नीति और रूसी गैस का विकल्प ढूंढने की घोषणा के कारण रूस लगातार चीन की ओर बढ़ रहा है." यूक्रेन विवाद के कारण रूस गैस की कीमत में रियायत देने को मजबूर हुआ है.

इसके विपरीत चीन के विदेश नीति विशेषज्ञ चेंग शियाओहे का कहना है, "यूक्रेन संकट ने गैस डील पर सौदे को आसान कर दिया." संधि के अनुसार रूस 2018 से चीन को 30 साल के लिए हर साल 38 अरब क्यूबिकमीटर गैस की आपूर्ति करेगा. इस तरह चीन अपनी जरूरत का एक तिहाई हिस्सा रूस से ले पाएगा.

विवाद से करीबी

चीन शुरू में यूक्रेन में रूस की कार्रवाई से कतई खुश नहीं था. एक तो यूक्रेन के साथ उसके रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं, दूसरे वह हमेशा ही किसी देश के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत पर जोर देता रहा है और रूस ने क्रीमिया में इस सिद्धांत को तोड़ा था. लेकिन वह अपने परंपरागत सहयोगी का साथ बना कर रखना चाहता था. चेंग शियाओहे कहते हैं कि यह एक उलझन थी. लेकिन कुल मिलाकर यह विवाद रूस और चीन को और करीब लाया.

इस नई सहमति को रूस चीन के साथ कुल 43 समझौतों के जरिए और मजबूत करना चाहता है. पुतिन के दौरे पर गैस समझौते के अलावा साझा तौर पर एक हेलिकॉप्टर के निर्माण की संधि होगी. यह हेलिकॉप्टर एमआई 26 की तुलना में दोगुना यानि 80 टन सामान ट्रांसपोर्ट करने की हालत में होगा. पुतिन के दौरे पर 30 समझौतों पर दस्तखत होंगे. दोनों देश मिलकर एक यात्री विमान भी बनाना चाहते हैं जो भविष्य में एयरबस और बोइंग को चुनौती देगा. अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण रूस के लिए चीनी निवेश का महत्व बढ़ गया है.

पुतिन के साथ उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोसिन भी जा रहे हैं, जो चीनी नेताओं के साथ अंतरिक्ष से संबंधित परियोजनाओं पर बात करेंगे. उन्होंने हाल ही में कहा था कि रूस 2020 से यूरोप और अमेरिका के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र आईएसएस में सहयोग बंद कर देगा. संभव है कि अब रूस उभरते अंतरिक्ष राष्ट्र चीन के साथ सहयोग करे. चीन रूस का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल दोनों देशों के बीच 90 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ. 2020 तक इसे 200 अरब डॉलर करने का इरादा है. इसके विपरीत चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार यूरोप है जिसके साथ 2012 में उसका 434 अरब यूरो के माल और 43 अरब यूरो की सेवाओं खरीदफरोख्त हुई.

एमजे/आईबी (डीपीए)

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