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ताना बाना

चीन के पास 3000 साल का परमाणु ईंधन

चीन ने उपयोग में लाए जा चुके परमाणु ईंधन को फिर से उपयोग में लाने लायक बनाने में सफलता का दावा किया है और कहा है कि अब उसके परमाणु बिजलीघरों के लिए ईंधन की सप्लाई कम से कम 3000 साल तक के लिए सुरक्षित है.

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चीन के सरकारी टेलिविजन ने एक रिपोर्ट में कहा है कि नई तकनीकी के चलते चीन में मिले यूरेनियम 3000 साल तक बिजलीघरों को चलाने के लिए पर्याप्त हैं. अब तक कहा जा रहा था कि वे 50 से 70 साल के लिए काफी हैं.

उपयुक्त परमाणु ईंधन को फिर से उपयोग में लाने की तकनीक में उसमें से प्लूटोनियम और यूरेनियम को फिर से अलग करना है. टेलीविजन रिपोर्ट का कहना है कि नई तकनीक से ईंधन का उपयोग 60 गुना बेहतर हो जाएगा. रिपोर्ट में नई तकनीकी के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी गई है.

चीन विश्व में ईंधन की सबसे ज्यादा खपत करने वाला देश है और वह अपनी तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु बिजलीघरों के व्यापक विस्तार पर जोर दे रहा है. दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला चीन न सिर्फ कोयले की सबसे अधिक खपत करने वाला देश है बल्कि चोटी का पर्यावरण प्रदूषक भी. चीन में इस समय 12 परमाणु बिजली घर काम कर रहे हैं और 24 का इस समय निर्माण किया जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार चीन इस समय लगभग 70,000 गीगावाट बिजली का उत्पादन परमाणु बिजलीघरों में करता है. 2020 तक वह अपनी परमाणु क्षमता आठगुनी बढ़ाना चाहता है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: ए जमाल

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