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मनोरंजन

चीन की फिल्मों में चीनी कम

पिछले साल चीन में बॉक्स ऑफिस में 30 फीसदी की उछाल आई. लेकिन मुनाफे का आधा हिस्सा सीधे किसी और को मिला. आखिर किसके कारण हुई चीन के फिल्म जगत में चीनी कम?

पिछले साल चीन में बॉक्स ऑफिस में 30 फीसदी की उछाल आई. लेकिन मुनाफे का आधा हिस्सा किसी और को मिल गया. आखिर किसके कारण हुई चीन के फिल्म जगत में चीनी कम?

हॉलीवुड फिल्म स्काईफॉल ने चीन में भी मैदान मारा और देसी फिल्मों को पछाड़ दिया

हॉलीवुड फिल्म स्काईफॉल ने चीन में भी मैदान मारा और देसी फिल्मों को पछाड़ दिया

बाजी मारता हॉलीवुड

चीन में फिल्मों में लोगों की बढ़ रही दिलचस्पी के चलते हर रोज 10 नए सिनेमाघर खुल रहे हैं लेकिन लोग जो फिल्में देखना चहते हैं वे चीनी फिल्में नहीं हैं. बाजी मार गईं हॉलीवुड फिल्में. साल में रिलीज हुई कुल 893 चीनी फिल्मों के मुकाबले इन विदेशी फिल्मों की संख्या मात्र 34 थी. पिछले साल मुनाफे का 51.5 फीसदी हिस्सा हॉलीवुड फिल्मों की झोली में चला गया.

हॉलीवुड और विश्व व्यापार संगठन से लगातार दबाव के बाद 2012 में चीन ने अपने यहां दिखाई जाने वाली विदेशी फिल्मों के कोटे में सिर्फ 20 फिल्मों का इजाफा किया. इसका नतीजा यह हुआ कि 10 साल में पहली बार 2012 में विदेशी फिल्मों ने देसी फिल्मों को किनारे कर आधे से ज्यादा कमाई अपने नाम कर ली.

कला-संस्कृति में पिछड़ता चीन

स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ रेडियो, फिल्म एंड टेलीविजन (सार्फ्ट) के अनुसार दुनिया की तीसरी सबसे कामयाब फिल्म इंडस्ट्री होने के बावजूद चीन की फिल्में पीछे रह गईं. सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने के बाद भी चीन संस्कृति के क्षेत्र में विश्व्वयापी असर नहीं छोड़ पाया जैसा कोरियाई संगीतकार साई ने हाल ही में अपने गाने 'गैंगनैम स्टाइल' से छोड़ा, या जो प्रभाव भारतीय शास्त्रीय संगीतकार पंडित रविशंकर ने छोड़ा.

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने भी माना कि चीन का सारा ध्यान आर्थिक और राजनैतिक स्थिति पर ही रह गया. इस बीच सांस्कृतिक क्षेत्र में वह काफी पीछे रह गया. लेकिन उद्योग की दुनिया के विश्लेषक रांस पोव को भरोसा है कि घरेलू फिल्म निर्देशक भी धीरे धीरे संभल जाएंगे. उन्होंने कहा, "चीन की व्यवासायिक फिल्में चीन में भी और बाहर भी पसंद की जाती रही हैं. और आगे भी यह जारी रहेगा."

सार्फ्ट के उपमंत्री तिआन जिन ने पिछले साल निर्माताओं से अपील की थी कि वे अपनी फिल्मों को और दिलचस्प बनाएं ताकि विदेशी फिल्मों से मिल रही टक्कर का सामना किया जा सके.

दोषी कौन

चीन का सिनेमा बाजार के लिहाज से अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है. दुनिया का सबसे बड़ा सिनेमा समूह भी चीन का ही है. वांडा चीन का एक बड़ा उद्योग समूह है. पिछले साल अमेरिकी सिनेमा कंपनी एएमसी को खरीद लेने के बाद यह सिनेमा जगत में भी दुनिया का सबसे बड़ा समूह बन गया. लेकिन लोग अब भी विदेशी फिल्मों को पसंद कर रहे हैं. वजह क्या है?

चीन में 25 साल से कामयाब फिल्में बना रहे फिल्म निर्माता रॉबर्ट केन कहते हैं कि ज्यादातर चीनी फिल्में तब चलीं जब बहुत सी बड़ी विदेशी फिल्मों के रिलीज पर रोक थी. जेम्स बॉन्ड की जबरदस्त हिट 'द स्काईफॉल' और 'द हॉबिट' दुनिया भर में तो पिछले साल ही रिलीज हो गई लेकिन चीन में उनकी रिलीज 2013 के लिए तय की गई. इतने दिन लोग इंतजार नहीं करना चाहते और ज्यादातर लोग डीवीडी खरीद कर फिल्म देख लेते हैं.

हांग कांग के फिल्म अकादमी विश्विद्यालय में रिसर्च कर रहे पेन कैंग कहते हैं, "जितनी भी फिल्में कामयाब रहीं वे सब हॉलीवुड की थीं. उन फिल्मों के मुकाबले चीनी फिल्मों में तकनीक उतनी बढ़िया नहीं दिखाई देती. हॉलीवुड से यहां की फिल्मों का कोई मुकाबला ही नहीं है."

दिक्कत वहां भी आती है, जहां सेंसर बोर्ड फिल्मों पर कैंचियां चलाता है. लोगों को क्या देखना चाहिए क्या नहीं इस मामले में कम्युनिस्ट पार्टी का भारी दखल है. मौजूदा राजनैतिक स्थिति के बारे में फिल्म में किस तरह से दिखाया गया है इस पर उनका खास ध्यान रहता है. चीन के बहुचर्चित निर्देशक जाई फाई ने हाल ही में कहा कि सेंसर बोर्ड चीनी संस्कृति और सभ्यता को तोड़ने मरोड़ने वाला काला धब्बा बन कर रह गया है. इससे न सिर्फ कलाकारों का, बल्कि संसाधनों का भी नुकसान हो रहा है.

एसएफ/एजेए (एएफपी)

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