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विज्ञान

चीन की नदी में मिले हजारों सूअर

चीन की एक नदी में दो हजार से ज्यादा मरे हुए सूअर मिले हैं. माना जा रहा है कि बीमार सूअरों से छुटकारा पाने के लिए किसानों ने ऐसा किया. इस नदी से शंघाई में पीने का पानी पहुंचाया जाता है.

चीन में खाने पीने की चीजों में मिलावाट के मामले नए नहीं हैं, लेकिन अब लोगों को पीने के पानी के दूषित होने का डर सता रहा है. झेजिआंग प्रांत की हुआंगपु नदी में करीब 2,200 मरे हुए सूअर मिले हैं. स्थानीय मीडिया के अनुसार इस संख्या के बढ़ने की आशंका है.

मीडिया में यह किस्सा इतना उछल चुका है कि संसद में भी बहस का मुद्दा बन गया है. संसद में पीने के पानी को दूषित होने से रोकने पर बात करते हुए शंघाई जिला पर्यावरण संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष सू रौंग ने कहा, "हमें जल्द से जल्द उन लाशों को वहां से हटाना होगा ताकि पानी साफ रहे."

सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं, पर अधिकारी अभी किसी भी तरह की टिप्पणी करने से बच रहे हैं. शंघाई सरकार ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि लाशों को जमा करने का काम चल रहा है और साथ ही साथ पानी की भी लगातार जांच की जा रही है.

Schweinezuchtbetrieb in China

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा छाया हुआ है. कई ब्लॉगर सरकार की आलोचना कर रहे हैं. टिंग टाओ नाम के एक ब्लॉगर ने लिखा है, "सरकार और अधिकारियों को इसे संजीदगी से लेना चाहिए और इसकी तह तक पहुंचना चाहिए. सरकार को लोगों की जिंदगियों के बारे में सोचना चाहिए और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों को हल करने में जरा भी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए."

ग्लोबल टाइम्स अखबार के अनुसार पहली लाश गुरूवार को ही मिल गयी थी. इसके बाद से सरकार ने 12 नावों को लाशें ढूंढने के काम पर लगाया. अखबार में छपी तस्वीरों में नीली पौशाक पहने कर्मचारियों को नदी से लाशें निकालते हुए देखा जा सकता है. माना जा रहा है कि किसी बीमारी के कारण इतनी बड़ी तादाद में इन जानवरों की मौत हुई और झेजिआंग जिले में सूअर पालने वाले किसानों ने उन्हें नदी में बहा दिया.

चीन के अखबारों ने निवासियों के डर को दिखाते हुए सवाल उठाया है कि क्या नदी का पानी अब भी पीने लायक बचा है. सरकार का कहना है कि हर घंटे पानी की जांच की जा रही है और अब तक के सभी नतीजे ठीक हैं. जानवारों पर किए गए टेस्ट में पोरसीन सिरकोवायरस पाया गया है. यह वायरस सूअर के लिए जानलेवा हो सकता है, लेकिन इंसानों पर इसका असर नहीं होता. लेकिन जानकारों को डर है कि यदि लाशों को जल्द से जल्द पानी से नहीं निकाला गया और वे नदी में ही सड़ने लगी तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी.

आईबी/एमजी (एएफपी/रॉयटर्स)

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