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दुनिया

चीन की ताकत से मजबूर भारत

दक्षिण एशिया में चीन की मौजूदगी बढ़ती जा रही है. भारत सरकार भी मान रही है कि चीन की बढ़ती ताकत को स्वीकार करने के अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं है. भारतीय विदेश मंत्री के मुताबिक भारत को नई सच्चाई स्वीकार करनी होगी.

भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि दक्षिण एशिया में चीन आर्थिक और कूटनीतिक कोशिशें तेज कर रहा है. हिंद महासागर के आस पास चीन के बढ़ते प्रभाव ने नई दिल्ली को चिंता में डाल दिया है. बीजिंग के श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव और म्यांमार जैसे देशों से संबंध मजबूत होते जा रहे हैं. भारत के इन पड़ोसियों को चीन आर्थिक मदद भी दे रहा है और वहां आधारभूत संरचनाएं भी पक्की कर रहा है.

नई दिल्ली में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा, "हमें इस नई सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि जिन इलाकों को पहले हम भारत और उसके दोस्तों का अड्डा मानते थे, उनमें से कई में अब चीन की मौजूदगी है."

Map India China Historical Border

अरुणाचल में विवादित सीमा

छह हफ्ते पहले विदेश मंत्री बने सलमान खुर्शीद के सामने चीन से निपटने की चुनौती है. भारत और चीन के बीच छह दशक पुराना सीमा विवाद है. 1962 में दोनों देश युद्ध भी लड़ चुके हैं. इस जंग के बाद से ही भारत और चीन एक दूसरे पर भरोसा नहीं करते. अब चीन दुनिया की दूसरी बड़ी महाशक्ति बन चुका है. लेकिन भारत के साथ सीमा विवाद जस का तस है.

अपने से ज्यादा ताकतवर देश के साथ सीमा के झगड़े को सुलझाना भारतीय नेताओं के लिए आसान नहीं है. नई दिल्ली कूटनीतिक रास्ता खोजने की तैयारी कर रहा है. खुर्शीद के मुताबिक, "चीन आक्रामक है. चीन हमारा साझेदार है. चीन हमारा पड़ोसी है. भारत की विदेश नीति की असली परख इसी में है कि वह चीन और भारत की ताकत को मिलाए."

पिछले महीने भारतीय नौसेना प्रमुख के एक बयान से विवाद खड़ा हो गया था. एडमिरल डीके जोशी ने कहा कि भारतीय नौसेना अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा करने के लिए दक्षिण चीन सागर जा सकती है. भारत ने वियतनाम के साथ दक्षिण चीन सागार में तेल निकालने की संभावनाओं पर संधि की है. दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर का वह हिस्सा है जिस पर चीन, वियतनाम, ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रूनई और सिंगापुर भी दावा करते हैं. चीन ने नौसेना प्रमुख के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और भारत को आगाह करते हुए कहा कि वह विवादित समुद्र से दूर रहे. बाद में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन को भी बीजिंग में इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ी.

चीन ब्रिटिश इंडिया के कुछ इलाकों को भारत का हिस्सा नहीं मानता है. वह अक्साई चीन और अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताता है. 1947 से पहले तक अरुणाचल प्रदेश का तवांग मठ तिब्बत को टैक्स देता था. भारत के आजाद होने के बाद तिब्बत को टैक्स देना बंद कर दिया गया. लेकिन इसी दौरान चीन ने तिब्बत पर हमला कर उसे अपने देश में मिला लिया. इसके बाद चीन ने दावा किया कि तिब्बत को टैक्स देने वाला अरुणाचल भी उसी का हिस्सा है.

ओएसजे/एमजे (एएफपी)

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