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दुनिया

चीन की ताकत बढ़ने से अमेरिका को चिंता

चीन ने कहा है कि उसकी बढ़ती रक्षा क्षमता पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की ताजा रिपोर्ट दोनों देशों के सैन्य रिश्तों के लिए ठीक नहीं है. चीन की सैन्य क्षमता के बढ़ते दायर पर अमेरिकी चिंता पर चीन का मीडिया भी लाल तेज.

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चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग यानशेंग ने समाचार एजेंसी एएफपी को फैक्स पर भेजे गए एक बयान में कहा है, "इस रिपोर्ट को जारी करना चीन अमेरिकी सैन्य संबंधों की बेहतरी और उसके विकास के लिए लाभदायक नहीं है."

सोमवार को जारी रिपोर्ट में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि 2008 में सत्ता में आई ताइवान की चीन समर्थक सरकार से अच्छे संबंधों के बावजूद ताइवान जलडमरूमध्य में चीन का सैनिक विस्तार बेरोकटोक जारी है. पेंटागन ने कहा कि परमाणु हथियार, लंबी दूरी के मिसाइल, पनडुब्बी, विमानवाही युद्धपोत और साइबर युद्ध सहित कई क्षेत्रों में चीन खर्च बढ़ा रहा है.

अपने बयान में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग ने इस पर जोर दिया है कि चीन "शांतिपूर्ण विकास की राह" पर है. गेंग ने कहा, "चीन रक्षात्मक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर दृढ़ता से अमल कर रहा है, सैन्य विवादों में हिस्सा नहीं लेता और किसी देश के लिए सैनिक खतरा नहीं है."

अमेरिका से इस तरह की रिपोर्टों के प्रकाशन को रोकने की मांग करते हुए गेंग ने कहा है, "हम अमेरिका से ऐसी टिप्पणियों और व्यवहार को रोकने की मांग करते हैं जो दोनों देशों की सेनाओं के पारस्परिक भरोसे और चीन अमेरिकी संबंधों के लिए लाभदायक नहीं हैं."

बुधवार को चीन के सरकारी मीडिया ने इस मुद्दे पर बहुत से विशेषज्ञों की राय प्रकाशित की है जिसमें पेंटागन की रिपोर्ट को आक्रामक बताते हुए उसकी आलोचना की गई है. दैनिक चाइना डेली के अनुसार चीन की एकेडमी ऑफ सोशल साइसेंस के नी फेंग कहते हैं, रिपोर्ट पेशवर नहीं है. उसमें ठोस सबूत दिए बिना संदेहास्पद संदर्भों का इस्तेमाल किया गया है.

सिंगापुर की नैशनल यूनिवर्सिटी के ईस्ट एशियन इंस्टीट्यूट के निदेशक झेंग योंगमियां ने ग्लोबल टाइम्स से कहा है कि रिपोर्ट की भाषा बहुत आक्रामक है जबकि दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय के स्वर में नरमी आई है.

अमेरिका की ओर से ताइवान को हेलिकॉप्टरों, मिसाइल डिफेंस और माइन स्वीपरों की आपूर्ति वाले 6.4 अरब डॉलर का सैनिक पैकेज देने की घोषणा के बाद चीन ने अमेरिका के साथ सैनिक संबंधों को रोक दिया था. चीन ताइवान को अपना विद्रोही प्रांत मानता है. 1949 में गृह युद्ध में राष्ट्रवादियों पर कम्युनिस्टों की जीत के बाद राष्ट्रवादी नेता भागकर ताइवान चले गए थे और तब से वह स्वतंत्र देश की तरह है.

रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा

संपादन: ए कुमार

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