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दुनिया

चीन और भारत का विकास दूर करेगा दुनिया का संकट

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि चीन और भारत के नेतृत्व में एशिया की तरक्की ही पूरी दुनिया को विकास के रास्ते पर वापस लाएगी. आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक के दौरान वॉशिंगटन में ये बातें कही गईं.

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आईएमएफ में एशिया प्रशांत क्षेत्र के निदेशक अनूप सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "आईएमएफ को उम्मीद है कि मंदी से बाहर निकलने का सिलसिला जारी रहेगा और 2010 में विकास की दर 8 फीसदी रहेगी. फिर अगले साल से यह दर 7 फीसदी पर आ कर स्थिर हो जाएगी. भारत और चीन एशिया के विकास का नेतृत्व करेंगे और इस साल इन दोनों देशों की विकास दर 9.7 और 10.7 फीसदी रहने की उम्मीद है."

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दुनिया भर में छाई भारी मंदी के दौर में एशिया का विकास के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन इस साल भी जारी है. अनूप सिंह का कहना है कि एशिया के विकास की यह गति दुनिया भर के लिए बेहद जरूरी है. सिंह ने यह भी कहा कि एशिया के विकास ने दुनिया के सभी देशों को इस मामले में पीछे छोड़ दिया है. हालांकि मंदी से बाहर निकलने की तेजी और विकास के पैमाने एशिया के देशों में भी अलग अलग हैं.

सिंह के मुताबिक, "चीन में उत्पादन का विकास अच्छा रहा है. इसके पीछे कर्ज में कमी आई है और प्रॉपर्टी का बाजार ठंडा रहा है. उधर भारत और इंडोनेशिया में घरेलू मांग ने विकास की तस्वीर खींची है, जबकि कुछ दूसरे एशियाई देशों में निर्यात की तेजी ने विकास का रास्ता बनाया है. जापान में साल के पहले छह महीनों में तेजी से विकास हुआ, हालांकि उसके बाद इसकी गति कमजोर पड़ी है."

कम आमदनी वाले कई एशियाई देशों मे विकास विदेशों में बढ़ी खपत के कारण हुआ. वहां कमोडिटी के क्षेत्र में भारी निवेश हुआ है. हालांकि विकास की इस दर को बनाए रखने के लिए घरेलू मांग और विकास के बीच बार बार संतुलन बनाए रखने की जरूरत पड़ेगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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