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दुनिया

चीनी सागर में शक्ति प्रदर्शन

ताइवान के पास चीन के युद्धपोत तैनात करने के बाद जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन शुरू कर दिया है. दोनों देशों के लड़ाकू विमान चीन के एयर डिफेंस जोन से गुजरे.

जापान और दक्षिण कोरिया के सैन्य विमानों ने चीन के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन से उड़ान भरी है. दोनों देशों की सरकारों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. जापान ने कहा है कि सेल्फ डिफेंस फोर्स के विमान ने जोन में गश्त लगाए हैं. दक्षिण कोरियाई एयरफोर्स ने भी कहा है कि उसकी वायु सेना के विमानों ने इलाके में उड़ान भरी है. चीन का कहना है कि उसने इन विमानों को देखा है.

इससे पहले चीन नें अपना विमानवाहक युद्धपोत सागर में उतार दिया है. विमानवाहक युद्धपोत लियाओनिंग के साथ चार जंगी जहाज भी थे जिन्होंने चीन और ताइवान के बीच मध्य रेखा के पश्चिम में करीब 26 किलोमीटर तक चक्कर लगाया. ताइवान की सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल लुओ शु हे के हवाले से यह खबर दी है. लुओ ने एजेंसी से कहा, "किसी जंगी जहाज ने मध्य रेखा को पार नहीं किया. हमारे जंगी जहाज और युद्धपोत चीनी बेड़े पर करीब से नजर रखे हुए हैं" उधर लियाओनिंग के कैप्टन झांग झेंग ने कहा कि युद्धपोत इलाके से गुजरने वाले विदेशी युद्धपोतों और विमानों पर "कड़ी निगरानी रखता है" कैप्टन का बयान चीन की सरकारी समचार एजेंसी शिन्हुआ ने छापी है.

जापानी सेना के विमानों ने पूर्वी चीन सागर के विवादित द्वीपों के ऊपर से नियमित निगरानी उड़ान भरी है. इन उड़ानों के बारे में चीन को पहले से जानकारी नहीं दी गई. जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशिहिदे सुगा ने पत्रकारो को इर बारे में जानकारी देते हुए कहा, वे अपनी निगरानी की कार्रवाई कर रहे हैं जैसा कि पहले से करते आ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा, "चीन के बारे में सोच कर हम अपनी नियमित कार्रवाई नहीं बदलने जा रहे हैं." सुगा ने कहा कि इलाके में जापानी नौसेना के चहाज और पी-3सी विमान नियमित रूप से गश्त लगाते हैं.

B-52 Bomber USA

बी-52 बमवर्षक विमान

चीन सागर फिलहाल एक तरह से जंग का मैदान बना हुआ है. चीन और जापान की सागर में उलझने की आशंका से दुनिया के देश चिंतित हैं. चीन ने नए एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन का एलान कर अपना दबदबा दिखाना चाहा तो जापान के समर्थन में आगे आए अमेरिका ने अपने बी-52 बमवर्षक विमानों के चक्कर लगवा कर उसे चुनौती दी. जापान के साथ अमेरिका का रक्षा गठबंधन है और चीनी प्रशासन को बिना जानकारी दिए विमान की गश्त करा कर कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है.चीन की सत्ताधारी पार्टी ने अमेरिकी विमानों की उड़ान पर चीन के जवाब को "बेहद धीमा" कहा है. चीन में सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर इसका जवाब देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

सागर में गर्मी बढ़ रही है और इसी बीच अगले हफ्ते अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बाइडेन चीन के दौरे पर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने चीन से अमेरिकी उप राष्ट्रपति के दौरे को रद्द करने की भी मांग की है. अमेरिका और जापान चीन पर आरोप लगा रहे हैं कि वह सेंकाकू द्वीपों पर अपनी दावेदारी बढ़ा रहा है. उधर चीन का कहना है कि दोनों देशों ने एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन लागू कर रखा है और उसके लिए वो दोहरा मानक बना रहे हैं. चीन का कहना है असल में उकसाने वाला देश जापान है.

दोनों देशों के बीच यह विवाद तो काफी पुराना है लेकिन शांत पड़ा था. सितंबर 2012 में जापान ने निजी मालिकों से तीन बियाबान द्वीप खरीद लिए. इसके बाद चीन ने जापान पर यथास्थिति को बदलने का आरोप लगाया और तभी से इलाके में गश्ती जहाजों और विमानों को भेज कर अपनी ताकत दिखाने लगा. इसके बाद से जापान ने भी अपने विमान और पोत भेजने शुरू कर दिए. सितंबर 2012 के बाद से पिछले 12 महीनों में जापानी लड़ाकू विमानों ने 386 बार उड़ान भरी है. द्वीप की तरफ एक ड्रोन को बढ़ता देख जापान ने उसे मार गिराने की चेतावनी दी जिस पर चीन ने कहा कि यह "जंग की कार्रवाई" होगी.

दोनों देशों की इन हरकतों ने दुर्घटनावश जंग शुरू हो जाने का जोखिम पैदा हो गया है हालांकि दोनों के कारोबारी हितों को देखते हुए सचमुच में ऐसा होने की आशंका कम है. दुनिया की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच कारोबारी संबंध काफी अहम है.

एनआर/एजेए (एएफपी, डीपीए)

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