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दुनिया

चीनी पटाखों से पस्त पटाखों की राजधानी

भारत की पटाखों की राजधानी शिवाकाशी में अबकी दीवाली उतनी चमकदार नहीं होगी. चीन से अवैध तरीके से आयात होने वाले सस्ते पटाखों ने शिवाकाशी में इस उद्योग से जुड़े पांच लाख लोगों के भविष्य पर संकट पैदा कर दिया है.

पटाखा निर्माताओं ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है. इस उद्योग में बाल मजदूरों के इस्तेमाल के भी आरोप लगते रहे हैं. दो साल पहले एक पटाखा फैक्टरी में लगी आग में 54 लोग मारे गए थे. उसके बाद भी सुरक्षा की स्थिति लचर ही है.

वैसे चीन में बने पटाखों के आयात पर पाबंदी है, लेकिन इसके बावजूद मुनाफा ज्यादा होने की वजह से अवैध रूप से बड़े पैमाने पर यह पटाखे भारत में पहुंच रहे हैं. दीवाली के सीजन में पूरे देश में शिवाकाशी में बने पटाखे ही भेजे जाते हैं. चीनी खतरे से निपटने के लिए निर्माओं ने इस साल कई नए किस्म के पटाखे बनाए हैं जिनकी कीमत दो हजार से लेकर 11 हजार तक है. तमिलनाडु के इस शहर में केंद्रित पटाखा उद्योग का सालाना टर्नओवर लगभग तीन हजार करोड़ रुपए का है. यहां पूरे साल पटाखे बनते हैं और दीवाली के सीजन में उनकी बिक्री होती है. देश में इस्तेमाल होने वाले 90 फीसदी पटाखे यहीं बनते हैं. शिवाकाशी और आसपास के इलाके में छोटी-बड़ी लगभग आठ सौ फैक्टरियां हैं और कोई पांच लाख लोगों की रोजी-रोटी पटाखों से ही चलती है.

तमिलनाडु फायरवर्क्स मैन्यूफैक्चर्रस एसोसिएशन के महासचिव सुंदर कहते हैं, "चीन में बने पटाखे सस्ते हो सकते हैं, लेकिन वे सेहत और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हैं." उनका दावा है कि शिवाकाशी में बने पटाखे सुरक्षा और क्वालिटी के लिहाज से चीनी पटाखों से काफी बेहतर हैं. तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेज मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एबीरूबेन कहते हैं, "चीनी पटाखों में पोटैशियम क्लोराइड का इस्तेमाल होता जो काफी सस्ता है. भारतीय पटाखों में उसकी जगह एल्यूमिनियम पावडर का इतेमाल होता है जो उसके मुकाबले छह गुना ज्यादा महंगा है."

हाल में केंद्र ने चीनी पटाखों के अवैध आयात के प्रति सख्त रवैया अपनाया है. इसके अलावा मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै खंडपीठ ने भी सीबीआई को चीनी पटाखों के अवैध आयात की जांच के निर्देश दिए हैं. इससे स्थानीय निर्माताओं ने कुछ राहत की सांस ली है. लेकिन उनका कहना है कि चीनी पटाखों की बढ़ती आवक की वजह से इस साल देश के दूसरे हिस्सों से उनको काफी कम आर्डर मिले हैं. केंद्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारामन ने चीनी पटाखों के अवैध आयात पर अंकुश लगाने के लिए तमिलनाडु समेत सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है.

दो साल पहले स्थानीय ओमशक्ति फायरवर्क्स की फैक्टरी में हुए विस्फोट में 54 लोगों की मौत हो गई थी. लेकिन उसके बावजूद अपनी जान हथेली पर लेकर दिन-रात बारूद के ढेर पर बैठे इस कस्बे की पटाखा फैक्टरियों में काम करने वाले कामगारों की हालत जस की तस है. ओमशक्ति जैसे बड़े हादसे के बाद सरकार और प्रशासन कुछ दिनों तक सक्रिय रहता है. लेकिन उसके बाद फिर इलाके में यथास्थिति बन जाती है.

तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेज मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एबीरूबेन का दावा है कि ओमशक्ति फैक्टरी में लगी आग में महज तीन कर्मचारियों की ही मौत हुई थी. बाकी लोग बाहरी थे. बीते दो साल में भी इलाके में आग लगने की कुछ घटनाएं हुई हैं. स्थानीय पुलिस अधिकारी के. जयचंद्रन कहते हैं, "छोटी-सी जगह में क्षमता से ज्यादा लोगों के काम करने और तय सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते ही ऐसे हादसे होते हैं."

स्थानीय उद्योग में बाल मजदूरी के भी आरोप लगते रहे हैं. लेकिन एसोसिएशन ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है. उसका कहना है कि छोटे स्तर पर या अपने घरों में पटाखे बनाने वाले कुछ लोग भले बाल मजदूरों का इस्तेमाल करते हों, बड़े उद्योगों में ऐसा नहीं होता. एबीरूबेन का कहना है, "सरकारी एजेंसियों को इस मामले की जांच करनी चाहिए ताकि हजारों करोड़ के इस उद्योग पर लगे बदनामी के इस धब्बे को मिटाया जा सके."

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