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विज्ञान

चीतों के घटने के लिए इंसान जिम्मेदार

पिछली सालों में दुनिया भर में चीतों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है. और इसके लिए कुछ हद तक इंसान जिम्मेदार हैं. यह बात चीतों की आबादी को लेकर जारी एक अंतरराष्ट्रीय शोध में सामने आई है.

चीतों पर नए शोध ने पहले हुए अध्ययनों के नतीजों को उलट दिया है, जिसमें कहा गया था चीतों की घटती संख्या का स्रोत बड़े परभक्षी पशु हैं, जो इस जानवर को मार देते हैं या फिर इनका खाना चुरा लेते हैं. लेकिन ताजा शोध में पाया गया है कि चीतों को खाने की तलाश में जितना लंबा सफर तय करना होता था अब उन्हें उससे ज्यादा दूरी तय करनी होती है. इसकी वजह इंसानी दखल, बाड़ों का निर्माण और विशाल खुले आवास की कमी है. शोध कहता है कि 1900 में दुनिया भर में चीतों की आबादी एक लाख थी जो आज घटकर 10,000 रह गई है.

क्वींस यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस के माइकल स्कैंटलबरी के मुताबिक, "वे अन्य प्रजातियों का सामना भी कर सकते हैं, जैसे शेर और लकड़बग्घे, वह उनके शिकार भी चुराते हैं. सच्चाई यह है कि बाड़ लगाने जैसी इंसानी गतिविधियां चीतों की मुक्त आवाजाही में बाधा जालता है. और इस वजह से चीतों को पहले से ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है. किसी अन्य कारक से ज्यादा यह चीतों को अपनी ऊर्जा से समझौता करा रहा है."

शोध के लिए रिसर्चरों ने आजाद घूमते 19 चीतों को ट्रैक किया. हर एक चीते का पीछा दो हफ्तों के लिए किया गया. दक्षिण अफ्रीका की दो अलग अलग जगहों पर ऐसा किया गया. शोधकर्ताओं ने चीतों में खास तरह का इंजेक्शन दिया जिससे उनके मल का विश्लेषण किया जा सके और यह पता चल सके कि जानवर ने कितनी ऊर्जा खर्च की.

स्कैंटलबरी कहते हैं, "हमने पाया कि चीतों की ऊर्जा खर्च समान आकार के अन्य स्तनधारियों से काफी अलग नहीं थी. चीता फरारी हो सकते हैं लेकिन ज्यादातर समय वे धीरे चलते हैं." शिकार के दौरान चीतों ने कम ऊर्जा खर्च की, यहां तक कि तेज दौड़कर शिकार का पीछा करने में भी. उनकी ज्यादा ऊर्जा का इस्तेमाल खाने की तलाश में लंबी दूरी तय करने में हुआ.

एए/एमजे(एएफपी)

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