1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

चिता तक पहुंचाती है सेहत की अति चिंता

जो लोग अपनी सेहत के बारे में बहुत ज्यादा चिंता करते हैं, उन्हें दिल की बीमारी होने का सबसे ज्यादा खतरा होता है. वैज्ञानिक और डॉक्टर भी अब यह मानने लगे हैं.

कई वैज्ञानिक शोधों में यह बात साफ हो चुकी है कि कैसे तनाव और सेहत के बारे में अति चिंता दिल की बीमारियों को बढ़ावा देते हैं. कुछ लोग अपनी सेहत के बारे में लगातार चिंता करते रहते हैं, वे अक्सर सोचते हैं कि कहीं मुझे ये बीमारी तो नहीं, कहीं ऐसा तो नहीं होने जा रहा है? विज्ञान की भाषा में इसे रोगभ्रम या हाइपोकॉन्ड्रिया कहा जाता है. कई शोधों के मुताबिक रोगभ्रम के शिकार व्यक्ति में धीरे धीरे उसी रोग के लक्षण उभरने लगते हैं जो वो सोचता है.

नॉर्वे में हुए एक ताजा शोध में भी यह स्पष्ट हुआ है. शोध के दौरान 7,000 लोगों से उनकी जीवनशैली, शिक्षा और हेल्थ के बारे में सवाल पूछे गए. सभी का चेकअप भी किया गया. इसी दौरान हाइपोकॉन्ड्रिया की जांच करने के लिए व्हाइटली इंडेक्स का सहारा लिया गया. सभी लोगों का बीते 12 साल का नेशनल हेल्थ डाटा भी निकाला गया.

रिसर्चरों को उम्मीद थी कि जो लोग अपनी सेहत के बारे में चिंतित रहते हैं, उन्हें कम खतरा होगा. शायद जागरूकता की वजह से. लेकिन नतीजा इसका उल्टा निकला. शोध के लीड रिसर्चर डॉक्टर लाइन इडेन बेर्गे के मुताबिक, "हम दिखा रहे हैं कि शोध में शामिल होने वाले वे लोग जिन्हें सेहत की ज्यादा चिंता थी, उन्हें खून की सप्लाई संबधी दिल की बीमारी होने का खतरा 70 फीसदी ज्यादा था."

शोध में शामिल न होने वाले कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर थोमास क्लिंगेनहेबेन के मुताबिक, "सामान्य तनाव का भी दिल पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है. चिंता में रहने वाले लोगों की सामान्य धड़कन भी दूसरों के मुकाबले ज्यादा तेज होती है - लगभग 80 धड़कन प्रति मिनट, जबकि एक औसत व्यक्ति में यह करीब 60 के आस पास होती है."

डॉक्टर बेर्गे के मुताबिक कई शोधों में साफ हो चुका है कि सेहत को लेकर अति चिंता और अवसाद के बीच भी संबंध है. दोनों ही दिल के लिए अच्छे नहीं हैं.

रोगभ्रम पर हो चुके कई वैज्ञानिक शोधों के बाद अब इलाज का नया तरीका खोजने की मांग भी हो रही है. डॉक्टर बेर्गे और क्लिंगेनहेबन के मुताबिक अच्छे हृदयरोग विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्टों के साथ साथ अच्छे मनोचिकित्सकों की भी जरूरत है. हाइपोकॉन्ड्रिया का पहले ही पता चलने पर कई बीमारियों को टाला जा सकता है.

(जानिये कुछ जीवनरक्षक टिप्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री