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विज्ञान

चिड़ियों की दुश्मन मोबाइल टावरों की जांच

मोबाइल टावरों से चिड़ियों को होने वाले खतरे की जांच के लिए केंद्र सरकार ने जानकार लोगों की एक समिति बनाने का फैसला किया है. केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की बनाई ये समिति खतरा भांप कर उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएगी.

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गायब होती गौरैया

भारत सहित कई देशों में पिछले कुछ सालों में हुए कई रिसर्च से ये पता चला है कि मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या ने गौरैया और मधुमक्खियों से उनका घर छीन लिया है. शहरों में आम तौर पर अब न तो गौरैया की चहचहाहट सुनाई देती है न ही मधुमक्खियों के छत्ते नजर आते हैं. कई रिपोर्ट में ये बात सामने आने के बाद अब भारत सरकार ने इसकी जांच का फैसला किया है.

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के निदेशक डॉक्टर असद रहमानी सरकार की बनाई कमेटी का नेतृत्व करेंगे. केरल के वैज्ञानिक डॉक्टर सैनुद्दीन पट्टाजी भी इस कमेटी के सदस्य है. पट्टाजी ने कहा कि देर से ही सही, लेकिन सरकार ने सही कदम उठाया है, " विद्वान, वैज्ञानिक और पर्यावरण के संरक्षक इसकी लंबे समय से मांग कर रहे थे." पट्टाजी ने पिछले साल अपनी रिसर्च रिपोर्ट पेश की थी. इसमें उन्होंने बताया कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली विद्युत चुम्बकीय तरेंगें मधमक्खियों को दिशाहीन कर देती हैं और यही वजह है कि उनके छत्ते नहीं बन रहे. इससे शहद के उत्पादन पर भी फर्क पड़ा है.

इस मामले में रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि गौरैया के घोसलों के गायब होने के पीछे भी मोबाइल टावर ही है. पहले हर घर में चिड़ियों का घोसला जरूर होता था पर अब ये कहीं नजर नहीं आता. सरकार ने कमेटी से इस बात की जांच करने को कहा है कि शहर, उपनगर, गांव और जंगलों में मोबाइल टावरों के बढ़ने से चिड़ियों और मधुमक्खियों की आबादी पर कितना असर पड़ा है. साथ ही इस असर को कैसे कम किया जा सकता है.

पैनल इस मामले में भारत और दूसरे देशों में अब तक हुए रिसर्च के रिपोर्टों की भी छानबीन करेगा. पैनल की रिपोर्ट के बाद मोबाइल टावरों के लिए जरूरी दिशा निर्दश बनाए जाएंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए जमाल

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