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दुनिया

चाहो न चाहो रतन टाटा दिखते रहेंगे

दो दशक पहले भारत में टाटा भरोसे का दूसरा नाम था लेकिन अब यह दुनिया के कई और देशों के लिए कामयाबी का नाम है. टाटा समूह को मुंबई से दुनिया के आकाश तक ले जाने वाले रतन टाटा रिटायर हो रहे हैं.

भारत के सबसे बड़े उद्योग घरानों में एक टाटा इंडस्ट्रीज के मुखिया रतन टाटा इस हफ्ते अपना 75वां जन्मदिन मनाने के साथ ही टाटा समूह की कमान किसी और के हाथ में सौंप रिटायर हो जाएंगे. नमक से लेकर ट्रक तक बनाने वाली और फोन से लेकर होटल तक चलाने वाली टाटा 100 से ज्यादा छोटी बड़ी कंपनियों का समूह है. एक मजबूत, टिकाऊ और लगातार बढ़ती कंपनी को दुनिया भर में नाम और काम दिलाने का श्रेय कई दशकों से इसका नेतृत्व कर रहे रतन टाटा को जाता है. खास तौर से पश्चिमी देशों की कई नामी गिरामी कंपनियों को खरीद रतन टाटा ने अपना कद और ऊंचा किया है.

Indien Auto EXPO in Neu Delhi 2010 Flash-Galerie

भारत के इस विशाल उद्योग घराने की कमान साइरस मिस्त्री को सौंपी जा रही है. कंपनी के 144 साल के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि कंपनी की जिम्मेदारी टाटा खानदान से बाहर के किसी शख्स के हाथों में जा रही है. रिटायरमेंट से पहले शुक्रवार को रतन टाटा ने कहा, "मैंने अपना जीवन जितना बेहतर तरीके से कर सकता था इस समूह की भलाई के लिए समर्पित किया है."

मीडिया से बचने वाले और बेहद सम्मानित रतन टाटा ने कंपनी के साथ 50 साल बिताए. 1991 में उन्होंने अपने चाचा जेआरडी टाटा से कंपनी की कमान अपने हाथ में ली. इसी साल भारत में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में आर्थिक सुधारों का दौर शुरू हुआ और रतन टाटा ने इसका भरपूर फायदा उठाया. वित्तीय सलाहकार आर बालाकृष्णन कहते हैं, "रतन टाटा बिना किसी उम्मीद के ऐसे वातावरण में आए थे जब समूह का नेतृत्व कर रहे लोगों ने सोचा कि वो शायद उन्हें (रतन टाटा को) संभाल लेंगे. आज जो बदलाव हो रहा है वो तो हैरान करने वाला है."

टाटा की कंपनियों में भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी, गाड़ी बनाने वाली सबसे विशाल कंपनी और शानदार होटलों की कतार शामिल है. कंपनी की कामयाबियों में टाटा मोटर्स का ब्रिटेन की घाटे में चल रही लग्जरी कारों की कंपनी जगुआर और लैंड रोवर को खरीदने के एक साल के भीतर ही नुकसान से फायदे में लाना भी शामिल है. जगुआर और लैंड रोवर अब टाटा मोटर्स की कमाई में 80 फीसदी का योगदान दे रहे हैं और इस करार ने टाटा की कारोबारी गाड़ियों और छोटी गाड़ियों वाली वाली पहचान को बदल कर शानदार कारों का अंतरराष्ट्रीय नाम बना दिया.

Tata Konzern Nano Auto Indien

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस रतन टाटा के नेतृत्व में 1994 में आम निवेशकों के लिए खोल दी गई वो भी ऐसे वक्त में जब निवेशक तकनीकी शेयरों के भविष्य को लेकर बहुत उम्मीद नहीं लगा रहे थे. इस वक्त यह कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वी इंफोसिस और विप्रो की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. रतन टाटा ऐसे वक्त में रिटायर हो रहे हैं जब टाटा समूह की सालाना बिक्री 100 अरब डॉलर तक जा पहुंची है. इनमें से करीब 60 फीसदी हिस्सा भारत से बाहर के व्यापार से आ रहा है जिसमें प्रमुख रूप से अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं. देश के एक और बड़े कारोबारी राहुल बजाज का कहना है, "उनका नेतृत्व शानदार रहा है."

कामयाबियों की लंबी दास्तान के बीच कुछ विवाद भी हैं. रतन टाटा उन कारोबारी नेताओं में से हैं जिनसे 2011 में संसदीय कमेटी ने कई अरब डॉलर के टेलीकॉम लाइसेंस घोटाले में पूछताछ की. भारत की जांच एजेंसियों ने बाद में टाटा समूह को क्लीन चिट दे दी.

टाटा समूह का नेतृत्व संभालने जा रहे साइरस मिस्त्री फिलहाल कंपनी के उपाध्यक्ष हैं. एक साल पहले उन्हें उत्तराधिकारी बनाने का एलान किया गया और तब रतन टाटा ने कहा था कि समूह,"किसी ऐसे हाथ में रहेगा जो कारोबारी वातावरण को उनसे बेहतर समझता है." रतन टाटा और साइरस मिस्त्री दोनों देश के पारसी समुदाय से आते हैं और उनके बीच पारिवारिक रिश्ता भी है. मिस्त्री के बहन की शादी टाटा के सौतेले भाई नोएल से हुई है. पहले नोएल को ही रतन टाटा का उत्तराधिकारी माना जा रहा था.

उत्तराधिकारी का एलान होने के बाद से अब तक मिस्त्री ने मीडिया से कोई बात नहीं की है.

लंदन के इंपीरियल कॉलेज और लंदन बिजनेस स्कूल में पढ़े मिस्त्री ऐसे समय में कंपनी की कमान संभाल रहे हैं जब कंपनी के मैनेजमेंट से जुड़े कई शीर्ष अधिकारी रिटायर हो रहे हैं. उनके सामने ग्रुप के विकास के लिए टाटा मोटर्स और टीसीएस से अलग नया क्षेत्र ढूंढने की चुनौती है. टाटा ने होटलों की अपनी कतार को विदेशों में विस्तार देने की कोशिश की है लेकिन पिछली चार तिमाहियों में इसे घाटा ही उठाना पड़ा है. टाटा स्टील की एंग्लो डच फर्म कोरस की खरीदारी का समय भी गलत साबित हुआ है क्योंकि यूरोप भारी मंदी की चपेट में हैं. 44 साल के मिस्त्री के पास वक्त और रतन टाटा हैं और इनके दम पर वो कामयाबी की नींव रख सकते हैं.

रतन टाटा रिटायर होने के बाद भी समाजसेवी ट्रस्टो के प्रमुख बने रहेंगे जिसके पास टाटा की प्रमुख कंपनी टाटा संस का दो तिहाई हिस्सा है और यह हर साल करोड़ों रुपये दान करती है. इसके साथ ही रतन टाटा नैनो के रिलॉन्च पर भी काम करना चाहते हैं. अविवाहित टाटा को तेज कारों, विमान उड़ाने, किताबों और पालतू कुत्तो का शौक है और अब वो इन्हें भी ज्यादा वक्त देना चाहते हैं, "मैं गायब नहीं होउंगा, आप चाहें न चाहें मेरा चेहरा देखते रहेंगे."

एनआर/एजेए(एएफपी)

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