1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

चाय बगान मालिक को जिंदा जलाया

भारतीय राज्य असम की एक चाय बगान के मजदूरों ने अपने मालिक और उनकी पत्नी को उन्हीं के बंगले में जिंदा जला दिया. विवाद होने के बाद गुस्साए मजदूरों की करतूत से इलाके में तनाव.

बुधवार को निजी चाय बगान एमकेबी टी एस्टेट के करीब 1,000 मजदूर बगान मालिक के बंगले के बाहर जमा हुए और वहां आग लगा दी. इस अग्निकांड में एस्टेट के मालिक मृदुल भट्टाचार्य और उनकी पत्नी रीता की मौत हो गई. देसी हथियारों के दम पर बगान मजदूरों ने पुलिसवालों को वहां घुसने नहीं दिया.

स्थानीय पुलिस अधिकारी ए दास ने बताया, "बगान मालिक का शरीर इतनी बुरी तरह जल गया है कि पहचान में नहीं आ रहा है, जबकि उनकी पत्नी का शव रसोई में पड़ा मिला." यह घटना असम के चाय पैदा करने वाले इलाके तिनसुकिया जिले में हुई. यह जगह राजधानी गुवाहाटी से करीब 500 किलोमीटर दूर है.

एक भारतीय अखबार के मुताबिक हिंसा तब भड़की जब बगान मालिक ने मजदूरों से उनका क्वार्टर खाली करने को कहा. इससे पहले बगान के तीन कर्मचारियों को पुलिस ने किसी अज्ञात विवाद के सिलसिले में हिरासत में भी लिया. बगान मजदूर स्थानीय टीवी चैनलों पर हमला करने की बात मानते दिखाए गए हैं. बगान की एक महिला कर्मचारी ने न्यूज लाइव पर कहा, "हम सभी आए और बंगले पर हमला कर वहां आग लगा दिया. वे लोग मारे जाने लायक थे क्योंकि मालिक हमारा शोषण कर रहे थे और छोटी छोटी बातों के लिए हमें यातना दी जा रही थी." टीवी चैनल ने इस महिला की पहचान जाहिर नहीं की है.

भारत में पैदा होने वाली चाय का करीब 55 फीसदी असम में पैदा होता है. वजन के पैमाने पर देखें तो हर साल असम करीब एक अरब किलो चाय पैदा करता है. असम में 800 से ज्यादा चाय बगान हैं.

चाय बगान मालिकों और मजदूरों के बीच मनमुटाव और विवाद की जड़ें गहरी हैं. चाय बगानों में काम करने वाले लोग स्थानीय हैं जबकि ज्यादातर बगान मालिक असम से बाहर के हैं. स्थानीय लोग बाहरी लोगों पर सिर्फ अपना हित देखने और इलाके को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हैं. इतना ही नहीं बीते सालों में मजदूरों के बीच भी बाहरी लोगों की पैठ बढ़ी है. बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा बांग्लादेश से आए अवैध नागरिकों के कारण भी संतुलन बिगड़ा है. नतीजा यह हुआ कि विवाद बढ़े हैं हालांकि इन विवादों का इतना हिंसक रूप पहले कभी नजर नहीं आया.

एनआर/एजेए (एएफपी)

DW.COM