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दुनिया

चांसलर कार्यालय में जर्मन भारत परामर्शी बैठक

बर्लिन में जर्मनी और भारत की सरकारों की चौथी परामर्शी बैठक हो रही है. बैठक में चांसलर अंगेला मैर्केल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा विभिन्न विभागों के मंत्री भी भाग ले रहे हैं.

 

दोनों देश जिन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं उनमें आर्थिक सहयोग, विज्ञान और तकनीकी सहयोग, पर्यावरण सुरक्षा और विकासनीति के मुद्दे शामिल हैं. बैठक के बाद दोनों पक्ष कई सहमतिपत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे. उसके बाद दोनों देशों के सरकार प्रमुख एक कारोबारी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसका आयोजन भारतीय और जर्मन वाणिज्य संस्थाएं मिलकर कर रही हैं.

जर्मन उद्योग के एशिया प्रशांत आयोग के प्रमुख हुबर्ट लीनहार्ड की शिकायत है कि इस समय भारत और चीन जैसे देशों में जर्मन कंपनियों के साथ भेदभाव होता है. उन्होंने भारत से और सुधारों की मांग की है और ईयू भारत मुक्त व्यापार समझौते की वकालत की है. जर्मन उद्यमियों को लीनहार्ड ने सलाह दी है कि वे भेदभाव के बावजूद भारत और चीन में और ज्यादा निवेश करें. उन्होंने कहा कि वे इसे मौलिक सिद्धांत मानते हैं तभी इन बड़े देशों के आर्थिक विकास में जर्मन उद्यमों की हिस्सेदारी हो पायेगी. लीनहार्ड का कहना है कि अगले दो तीन दशकों में विश्व अर्थव्यवस्था का केंद्र एशिया में होगा. चीन और भारत में ही 1.7 अरब लोग रहते हैं. वहां आने वाले दशकों में बड़ी बड़ी कंपनियां बनेंगी.

पिछले दिनों चांसलर मैर्केल ने जी20 समूह के कई देशों के नेताओं से बातचीत की है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में भी वे जानने की कोशिश करेंगी कि किन मुद्दों पर भारत और जर्मनी के बीच व्यापक सहमति है. एक दिन बाद ही बुधवार को चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग बर्लिन आ रहे हैं, जहां वे चांसलर के साथ बातचीत करेंगे.

भारत चीन के साथ उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो जर्मनी के साथ नियमित रूप से मंत्रिस्तरीय परामर्शी बैठक करता है. शिखर सम्मेलनों से अलग इन बैठकों में उन विभागों के मंत्री भी भाग लेते हैं जिनमें दोनों देशों के बीच अच्छा सहयोग हो रहा है या सहयोग की योजना है. जर्मन भारत परामर्शी बैठकों की शुरुआत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 2011 में हुई और तब से यह हर दो साल पर होती है. जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है.

एमजे/आरपी (डीपीए)

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