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विज्ञान

चांद का नींद पर असर

पूर्णिमा का चांद जितना खूबसूरत दिखता है, कुछ लोगों को उससे उतना ही डर भी लगता है. कई लोग पूर्णिमा की पूरी रात करवटें ले कर काटते हैं. उन्हें यकीन होता है कि चांद ने ही उनकी नींद उड़ा दी है.

इस आम धारणा के उलट जर्मन वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि पूर्णिमा के चांद का नींद पर कोई असर नहीं होता है. नींद से जुड़े पूर्व के शोधों के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे. म्यूनिख स्थित मनोरोग की माक्स प्लांक संस्था में यह शोध किया गया.

शोधकर्ताओं का कहना है कि साल 2013 और 2014 में 30 से 50 लोगों को शामिल किया गया. इन पर दो शोध किए गए जिनमें कहा गया कि पूर्णिमा की रात के आसपास कुल नींद अवधि कम होती है. लेकिन दोनों शोध में अंतर पाया गया है. शोध के लिए रैपिड आई मूवमेंट पर ध्यान दिया गया, जो कि नींद की शुरूआत है, इसमें इंसान सपने देखता है. एक शोध में पूर्णिमा की रात के पास नींद में देरी की बात कही गई थी, दूसरे शोध में नए चांद के पास वाली रात में देरी बताई गई. शोधकर्ताओं ने नींद से जुड़े 1,265 परीक्षणों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. ये परीक्षण 2097 रातों में किए गए. लेकिन वे पिछले निष्कर्षों को दोहराने में असमर्थ रहे और इस बात को सिद्ध करने में भी कि मानव नींद और चंद्र चरणों के बीच एक सांख्यिकीय प्रासंगिक संबंध है.

इसके अलावा, वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने ऐसे अप्रकाशित नतीजों की पहचान की है जिनमें परीक्षण विषयों का विश्लेषण शामिल है. शोधकर्ताओं का कहना है कि 20,000 रातों में सोने की प्रवृत्ति में कोई संबंध नहीं देखा गया.

एए/आईबी (डीपीए)

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