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मनोरंजन

चलो मूंछ लगवाएं

मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी! पर जिसकी ना हों वह क्या करे? वह इस्तांबुल जा सकता है जहां इन दिनों सैलानी खास तौर से मूंछें लगवाने पहुंच रहे हैं.

तुर्की को मिठाइयों, कॉफी और हमाम के लिए जाना जाता है. अब इस सूची में एक नाम और जुड़ रहा है: मूंछ. मूंछों को दुनिया के कई हिस्सों में मर्दानगी की निशानी माना जाता है. तुर्की में भी ऐसा ही है. लेकिन जिसके पास बड़ी बड़ी मूंछें ना हों, उसे मुंह छिपाने की जरूरत नहीं है. वह तुर्की में पार्लर में जा कर इन्हें लगवा सकता है. यहां फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली नकली मूंछों की बात नहीं हो रही है. ये मूंछें बिलकुल असली हैं और इन्हें चिपकाया नहीं, ट्रांसप्लांट किया जाता है.

मूंछ बिन नहीं पहचान

मूंछों को ले कर इन दिनों तुर्की में पर्यटन शुरू हो गया है. कॉस्मेटिक सर्जन मूंछें लगाते हैं और वह भी आपकी मनचाही. ऐसा ही एक कॉस्मेटिक क्लिनिक चलाने वाले सेलाहत्तिन तुलुने बताते हैं, "मैं पिछले तीन साल से ये इम्प्लांट कर रहा हूं." वह पहले हेयर ट्रांसप्लांट यानी सिर पर बाल लगाने का काम करते थे.

Türkei Tradition Schnurrbart

पारंपरिक तुर्क दाड़ी मूंछ

लेकिन जब उन्होंने देखा कि इसमें फायदा कम है तो सर के बाल छोड़ लोगों की मूंछें उगाने लगे. मूंछें न होने से ग्राहक कितने परेशान होते हैं यह उनसे बेहतर कोई नहीं जानता. "मेरे पास कई आदमी आए जिन्होंने कहा कि मैं 40 साल का हूं, एक कंपनी का मालिक हूं, लेकिन विदेश जाता हूं तो कोई मुझे संजीदगी से लेता ही नहीं. मैं लोगों को दिखाना चाहता हूं कि मेरे पास भी बाल हैं."

30 साल के एनगिन कॉक क्लीन शेव हुआ करते थे, पर सात महीने पहले उन्होंने भी ट्रांसप्लांट कराने का मन बनाया. "मैं प्राचीन तुर्कों जैसा दिखना चाहता था, जैसे कि उस्मान राजवंश के लोग दिखा करते थे. मैं उस काल को बहुत खास मानता हूं, इसीलिए मैंने इम्प्लांट करा लिया." गर्व से अपनी मूंछों को सहलाते हुए वह कहते हैं कि उनके पास भी अब "तुर्क मर्दानगी की निशानी" है.

हर मूंछ कुछ कहती है

तुर्की में मूंछों को बहुत संजीदगी से लिया जाता है. देश में एक मशहूर कहावत है, "बिन मूंछ के आदमी वैसा ही है जैसे बिन बालकनी का घर." हर मूंछ एक अलग संदेश भी देती है. मानवविज्ञानी बेनोइट फ्लिशे बताते हैं, "अगर स्टालिन जैसी घनी मूंछें हों तो उसका मतलब कि आप वामपंथी हैं. अगर प्राधानमंत्री रेचेप तैयब एरदोआन जैसी साफ सुथरी मूंछें हैं तो आप धार्मिक और थोड़े रूढ़िवादी हैं. और अगर वह दोनों ही तरफ से लम्बी निकली हुई हो, तो फिर आप दक्षिणपंथी हैं."

Schnurrbart-Collage

हर मूंछ एक अलग संदेश देती है.

भले ही इनका सामाजिक मतलब हो, लेकिन यह फैशन भी है. ट्रांसप्लांट करने वाले तुलुने बताते हैं कि टीवी धारावाहिकों का लोगों पर बहुत असर होता है, "अरब लोग तुर्की धारावाहिक देखते हैं और हमारे कलाकारों को देख कर वे हमसे आ कर कहते हैं कि उन्हें भी वैसी ही दाढ़ी या मूंछ चाहिए."

इस्तांबुल में ही इस बीच कम से कम 250 ऐसे कॉस्मेटिक क्लिनिक खुल गए हैं जो मूंछें ट्रांसप्लांट कर रहे हैं. इनकी आय का जरिया अधिकतर पर्यटन ही है. ट्रैवल एजेंसी के साथ मिल कर वे सैलानियों को टूर पैकेज दिलवाते हैं जिनमें एयरपोर्ट से लाने और ले जाने से लेकर होटल में रहना सब शामिल होता है. कई पैकेज तो ऐसे हैं जो 2,000 यूरो यानी करीब डेढ़ लाख रुपये से शुरू होते हैं.

और इसकी लोकप्रियता इतनी है कि आंकड़ों की मानें तो पिछले साल 3.5 करोड़ लोग तुर्की पहुंचे, भले ही इन सब ने मूंछें ना लगवाई हो, पर पर्यटन को बढ़ावा तो मिला ही है. क्लीनिकों का कहना है कि औसतन दिन में एक ग्राहक तो मिल ही जाता है.

आईबी/एमजे (एएफपी)

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