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विज्ञान

चर्बी उतारनी है तो सीढ़ी चढ़ें

पहले अमीर देशों की समस्या माना जाने वाला मोटापा अब कई दक्षिण एशियाई देशों का सिरदर्द बन गया है. सिंगापुर में कुछ विशेषज्ञ महामारी की तरह फैलते मोटापे को जड़ फैलाने से पहले ही मिटा देने के लिए अनूठे प्रयोग कर रहे हैं.

सात साल पहले सिंगापुर के शॉन चिन के शरीर में फैट की मात्रा 24 फीसदी मिली. अब वह घट कर केवल नौ प्रतिशत रह गई है और वह पहले से कहीं ज्यादा पतले भी हुए हैं. चिन अब पर्सनल ट्रेनर के रूप में अपने कई ग्राहकों के घर जाकर मोटापा कम करने की जंग में मदद कर रहे हैं. एक बड़ी मुस्कान के साथ वह बताते हैं, "मोटापे से निजात पाने की तरफ सबसे जरूरी कदम है आत्मविश्वास बढ़ाना. मैं अपने मोटापे के समय की तस्वीरें दिखाकर ग्राहकों के मन में विश्वास जगाने की कोशिश करता हूं. मेरा मंत्र है, अगर मैं ऐसा कर सका तो आप भी कर सकेंगे."

ताकि मोटापा न हो आम

सिंगापुर के स्वास्थ्य विकास बोर्ड के सीईओ जी यूंग कांग बताते हैं कि मोटापा सरकार की प्राथमिकता है, "ऐसा होता है कि अगर कहीं के ज्यादातर लोग मोटे हो जाएं तो वह एक सामान्य बात बन जाती है और धीरे धीरे बाजार और पूरा ढांचा उनको अपना लेता है और इससे कई दूसरे लोग भी उसी तरह की जीवनशैली का हिस्सा बन जाते हैं." 2010 में सिंगापुर में मोटापे की दर करीब 13 से 14 फीसदी दर्ज की गई जो 2004 में दर्ज हुई 8.6 फीसदी से कहीं ज्यादा दिखाई देती है. मलेशिया में हर दो में से एक वयस्क या तो अपने आदर्श वजन से ज्यादा भार वाला या फिर साफ साफ मोटापे का शिकार है. थाइलैंड में मोटापा 1991 से 2009 के बीच करीब दोगुना हो गया है.

पूरी दुनिया में देखा जाए तो अभी भी दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में मोटापे की दर सबसे कम है लेकिन काफी तेजी से बढ़ रही है. लोगों की आय बढ़ना, दौड़भाग कम होना और ज्यादा वसा वाला खाना और फास्ट फूड की ओर बढ़ता झुकाव इन देशों में भी मोटापे का कारण बन रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी सरकारों से कहा है कि वे मोटापे से बचने के लिए पहले से ही कदम उठाएं जिससे बाद में छुटकारा पाने की कोशिशें बहुत महंगी पड़ती हैं.

बीमारियों की जड़

मोटापे के कारण डायबिटीज और दिल की बीमारियों से लेकर कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं. थाइलैंड में सरकारी स्कूलों में कार्बोनेटड सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. सरकार ज्यादा कैलोरी वाली चीजें और मीठी खाने की चीजों पर टैक्स बढ़ाने के बारे में भी सोच रही है. यह कदम इस बात के मद्देनजर उठाया जा सकता है कि आम तौर पर थाई लोग हर दिन औसतन छह चम्मच के बजाए करीब 23 चम्मच चीनी जितना मीठा खाते हैं.

रहे पोषण का ख्याल

सिंगापुर में बच्चों के कई केयर होम बच्चों को सफेद चावल के बजाए कम मोटा करने वाले भूरे रंग के चावल खिला रहे हैं. जगह जगह इमारतों पर निशान बना कर लिखा गया है कि वे लिफ्ट के बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. यहां तक की सरकार ने अपने निवासियों के सामने अगले तीन साल के अंदर कुल मिलाकर 10 लाख किलोग्राम वजन कम करने का लक्ष्य रखा है. ऐसा करने पर हर स्तर पर लोगों को कई तरह के इनाम देकर वजन घटाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. चिन कहते हैं, "व्यायाम के साथ साथ पोषण का भी ख्याल रखना जरूरी है. इसकी अति भी नुकसान कर सकती है. स्वस्थ खाएंगे तो शरीर आपको अपने अंदाज में धन्यवाद देगा."

आरआर/एजेए (रॉयटर्स)

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