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दुनिया

चरमपंथ के खिलाफ जर्मन मुसलमान

जर्मनी की दो हजार मस्जिदों में जुमे की नमाज के मौके पर इस्लामिक उग्रवाद के विरोध में "प्रार्थना दिवस" और रैलियों का आयोजन किया गया. इस मौके पर मस्जिदों पर हो रही आगजनी की घटनाओं का विरोध भी किया गया.

जर्मनी के चार प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने इस विशेष रैली का आयोजन किया. जर्मनी की दो हजार से ज्यादा मस्जिदों के इमाम इस खास आयोजन में शामिल हुए. मुसलमानों की समन्वय परिषद के प्रवक्ता अली किजिल्क्या के मुताबिक, "जब नफरत से जुड़े अपराध होते हैं तो हमें एक समाज के तौर पर साथ खड़े रहने की जरूरत है चाहे वह चर्च, मस्जिद या सिनेगॉग या प्रार्थना के अन्य स्थानों के खिलाफ हो."

जर्मनी में मुसलमानों की केंद्रीय परिषद के अध्यक्ष आयमान मात्सिएक का कहना है कि जर्मनी के मुसलमान सीरिया और इराक में लड़ाई लड़ने वाले इस्लामिक स्टेट और अन्य जिहादी अभियानों के खिलाफ रुख स्पष्ट करना चाहते हैं. जर्मनी के शीर्ष अखबार बिल्ड में उन्होंने लिखा, "ये लोग आतंकवादी और हत्यारे हैं जो इस्लाम को गंदगी में खींचते हैं. सीरिया और इराक के अलावा अन्य जगहों पर लोगों के बीच नफरत फैलाते हैं और उन्हें कष्ट पहुंचाते हैं, खासकर खुद के साथी मुसलमानों के बीच. हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि इस देश के मुसलमान और दुनिया के ज्यादातर मुसलमान अलग तरह से सोचते और अलग ढंग से काम करते हैं. इस्लाम शांति का धर्म है."

पिछले रविवार को बर्लिन में यहूदी विरोध की आलोचना के लिए रैली का आयोजन किया गया था. इस रैली में जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल समेत अन्य नेता शामिल हुए. जर्मन चांसलर ने इस मौके पर यहूदियों के खिलाफ हमले की घटनाओं की निंदा की. जुलाई महीने में जब फलीस्तीन के पक्ष में प्रदर्शन में हुए थे तब कुछ प्रदर्शनकारियों ने यहूदियों के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था. यह प्रदर्शन इस्राएल के गाजा पर हमले के बाद हुए थे. मुसलमानों का कहना है कि वे भी जहरीले भाषणों के निशाने पर हैं और जनता में इस्लामी आतंकवाद के बढ़ते भय के बाद उनके घर और मस्जिद भी निशाने पर हैं. जर्मन सुरक्षा विभाग का कहना है कि 400 जर्मन नागरिक सीरिया और इराक में जिहाद में शामिल हो चुके हैं. जिनमें में से 130 लोग घर वापस आ चुके हैं. कुछ जर्मन नागरिक सोमालिया में अल कायदा से जुड़े अल शहाब के लिए भी लड़ाई लड़ चुके हैं.

हाल के दिनों में शरिया पुलिस वाला जैकेट पहन कुछ लोग जर्मनी की सड़कों पर निकल पड़े. जर्मनी की घरेलू खुफिया विभाग के अनुमान के मुताबिक 43,000 लोग ऐसे हैं जो कट्टरपंथी गुटों से जुड़े हैं. यह संख्या लगातार बढ़ रही है और इनमें सलाफियों के साथ जाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, यह इस्लाम की अति रुढ़िवादी विचारधारा है.

मात्सिएक के मुताबिक पिछले तीन हफ्तों में मस्जिदों में आगजनी की पांच और अन्य हमले की घटनाएं हो चुकी हैं. बर्लिन के अलावा, हैम्बुर्ग, मोएल्न, फ्रैंकफर्ट और श्टुटगार्ट जैसे शहरों में शांति रैली का आयोजन किया गया.

एए/एमजे(एपी, डीपीए)

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