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दुनिया

घरेलू हिंसा के दाग मिटाने की मुहिम

ब्राजील के साओ पाउलो में छेड़ी गई मुहिम के तहत घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं को प्लास्टिक सर्जरी की मदद से बदनुमा दागों से छुटकारा दिलाया जा रहा है. कई महिलाओं के लिए सालों से बंद कमरों में सिमट चुका जीवन लौट रहा है.

जैकलीन सांतोस ओलिवेइरा का कटा पिटा चेहरा ना सिर्फ उसे उस दर्दनाक दिन की याद दिलाता है, बल्कि वह कहती है "जब कभी मैं बाहर निकलती हूं ऐसा लगता है हर नजर मुझे ही घूर रही हो."

महिलाओं के साथ बदसलूकी और घरेलू हिंसा के मामले में ब्राजील काफी आगे है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार ब्राजील में हर दूसरी महिला जीवन में कभी न कभी घरेलू हिंसा का शिकार रही है. 70 फीसदी मामलों में जुल्म करने वाला पति या पुरुष मित्र होता है.

साओ पाउलो में ब्राजील सोसाइटी ऑफ प्लास्टिक सर्जरी ने एक गैर सरकारी संस्था 'द ब्रिज' के साथ हाथ मिलाकर इन महिलाओं की मदद के लिए कदम उठाया है. घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं को यहां मुफ्त में प्लास्टिक सर्जरी दी जा रही है. ओलिवेइरा उन महिलाओं में से एक हैं जिन्हें यहां सर्जरी कराने का मौका मिला.

सड़क पर हमला

26 साल की ओलिवेइरा का एक ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन अभी आगे और भी बाकी हैं. वह कहती है, "एक बार सारे ऑपरेशन हो जाएं फिर मैं दोबारा पहले जैसा महसूस कर सकूंगी."

चार साल पहले साओ पाउलो के एक पेट्रोल स्टेशन के सामने उसके ब्वायफ्रेंड ने उस पर हमला किया. इस हादसे में उसकी जान तो बच गई लेकिन जिंदगी के दोबारा सामान्य होने में बहुत समय लग गया. इसके अलावा शर्मिंदगी ने जैसे दामन ही थाम लिया. वह कहती है उस हादसे के बाद वह बहुत से पुराने कपड़े दोबारा नहीं पहन पाई. वह वही कपड़े पहनती हैं जिनसे शरीर के दाग छुपे रहें.

ठीक इसी तरह रोजेनीड फर्नांडीस डासिल्वा भी अपने साथ हुई हिंसा के बाद से शर्मिंदगी का जीवन जी रही है. उस पर हुए जानलेवा हमले को करीब दो दशक बीत चुके हैं. अठारह साल की उम्र में दो बार चेहरे की तरफ चली गोली से चेहरे को बचाने के लिए उसने अपना हाथ मुंह पर रख लिया. हादसे में उसका हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया.

कई सालों तक अस्पताल के चक्कर लगते रहे. वह बताती है, "बार बार मेरी त्वचा संक्रमित हो जाती थी. बार बार उन्हें मेरे बाजू से त्वचा निकालनी पड़ती थी. हर ऑपरेशन मेरे लिए एक और बार गोली का निशाना बनने जैसा था." हालत यह हो गई कि वह अपनी कोहनी मोड़ भी नहीं सकती थी. लेकिन हाल में मुफ्त में मिली प्लास्टिक सर्जरी ने डासिल्वा की बहुत मदद की. वह कहती हैं, "जब मैंने पाया कि मैं एक बार फिर कोहनी मोड़ सकती हूं, मैं वहीं रो पड़ी."

सामाजिक रवैया

ब्राजीलियाई कानून के मुताबिक इन दोनों ही महिलाओं को सरकारी अस्पताल में मुफ्त प्लास्टिक सर्जरी मिलनी चाहिए. लेकिन इसके लिए वेटिंग लिस्ट बहुत लंबी होती है. नए कार्यक्रम के तहत घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं की जल्द मदद की जा सकती है.

देश में महिला कल्याण सचिवालय की लाउर्डिस मारिया बांडेइरा कहती हैं कि गलत सामाजिक रवैये की वजह से महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़े हैं. ब्राजील के पुरुष प्रधान समाज में अक्सर महिलाओं को ही उनके खिलाफ हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है.

ओलिवेइरा कहती है कि उसने भी इस तरह का रवैया सहा है. उस पर हुए हमले के बाद पुलिस ने भी उसके साथ यही बर्ताव रखा. वह बताती है, "उन्होंने कहा कि मेरे साथ जो हुआ वह मेरी ही गलती की वजह से हुआ कि मैं ऐसे मर्द के साथ थी. कई बार जब लोग देखते हैं कि आप अकेले बच्चे की परवरिश कर रही हैं और आपके शरीर पर चाकू की चोट के निशान हैं, तो लोग मजाक उड़ाते हैं." अब हालांकि दोनों ही महिलाएं खुश हैं और जिंदगी दोबारा उनके आंगन में धीरे धीरे दस्तक दे रही है. लेकिन पूरी तरह ठीक होने में अभी लंबा समय लगेगा. डासिल्वा कहती हैं, "मुझे धीरे धीरे लगने लगा है कि मैं दोबारा जिंदा हो रही हूं."

रिपोर्ट: मारीना एस्टार्क/ एसएफ

संपादन: आभा मोंढे

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