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मंथन

घड़ी बताएगी गोल

कई बार आंखों देखी चीज सच नहीं होतीं. रेफरी या अंपायर की आंखें कई बार धोखा खा जाती हैं. अब एक ऐसी घड़ी तैयार की गई है जो रेफरी बता देगी कि गोल हुआ कि नहीं.

जर्मन फुटबॉल लीग बुंडेसलीगा का विवादास्पद पल. लेवरकूजन के खिलाड़ी का शॉट गोलपोस्ट से बाहर निकल गया और बाद में जाल में बने छेद से गोलपोस्ट में आ गया. रेफरी ने जो देखा, उसके हिसाब से गोल दे दिया. पर यह मामला विवाद के साथ कारोबार का मौका लेकर आया. गोल कंट्रोल 4 डी सिस्टम से गोलपोस्ट के आसपास के हर इंच पर नजर रखी जा सकती है. गोल कंट्रोल कंपनी के प्रमुख डिर्क ब्रोखनहाउजेन बताते हैं, "गलती की संभावना सिर्फ पांच मिलीमीटर की है. या उससे भी कम. इतना सटीक गोललाइन हो नहीं सकता."

सात विशेष कैमरे हर सेकंड पांच सौ तस्वीरों के साथ गोल का पीछा करते हैं. जैसे ही बॉल गोललाइन पार करता है, रेफरी की घड़ी में सिग्नल चला जाता है.

गोललाइन की इस तकनीक का पहला इस्तेमाल फुटबॉल वर्ल्ड कप में होगा. फीफा ने फैसला दक्षिण अफ्रीका में पिछले वर्ल्ड कप में हुए एक गलत निर्णय के बाद लिया. जर्मनी के खिलाफ इंगलैंड के फ्रैंक लैम्पार्ड ने गोल किया, जिसे रेफरी ने नहीं माना. ब्राजील में अब जर्मन कंपनी वर्ल्ड कप के सभी बारह स्टेडियमों में यह तकनीक लगाएगी. उसने उन सभी कंपनियों को पछाड़ दिया जो गोलपोस्ट और बॉल में चुम्बकीय क्षेत्र का इस्तेमाल करना चाहती थीं. "हम सभी बॉल के साथ खेल सकते हैं. हमारा सिस्टम आत्मनिर्भर है. इसका मतलब हुआ कि ग्रीनकीपर इस सिस्टम से स्वतंत्र अपना काम कर सकता है. कैमरों को टर्फ के सिस्टम से अलग इंस्टॉल किया जाता है. और सबसे बड़ी खूबी यह है कि सर्विसिंग की भी जरूरत नहीं."

गोल कंट्रोल ने आखेन के टिवोली स्टेडियम में यह सिस्टम टेस्ट के लिए लगाया है. इस सिस्टम को लगाने पर 2 लाख यूरो का खर्च आता है. इसमें 14 हाईस्पीड कैमरे और एक केंद्रीय कंप्यूटिंग सिस्टम है. इस समय आखेन में अकेले ब्रोखहाउजेन हैं. उनके 20 कर्मचारी ब्राजील में यह सिस्टम लगा रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही बुंडेसलीगा में भी गोल लाइन तकनीक लागू की जाएगी और गोल कंट्रोल को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी. "यह घरेलू लीग है. और जर्मन कंपनी होने की वजह से हमें खुशी होगी, अगर हम बुंडेसलीगा के साथ सहयोग कर पाएं और लीग को अपने सिस्टम से सजा पाएं. पहली और दूसरी जर्मन लीग में, यह बड़ी बात होगी." उधर, होफेनहाइम में क्लब के सदस्य भी जरूर खुश होंगे. आखिर खेल के पहले ही दिन एक और गलती हुई थी, जिसकी वजह से टीम को दो प्वाइंट गंवाने पड़े. फोलांड का यह गोल माना नहीं गया, जबकि गेंद गोल लाइन के पीछे पहुंच चुकी थी.
रिपोर्टः मानसी गोपालकृष्ण

संपादनः आभा मोंढे