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विज्ञान

घट गया एक किलोग्राम का वजन

किलोग्राम ही भार का ऐसा एक मानक है, जिसकी स्पष्ट परिभाषा है. लेकिन अब उसके सही होने पर भी सवालिया निशान लग चुका है. किलोग्राम का वजन घट गया है.

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माक्स प्लांक के नाम पर बना है प्लांक कॉन्स्टैन्ट

फ्रांस के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ मेजरमेंट्स या बीआईपीएम में प्लैटिनम व इरिडियम का एक टुकड़ा रखा हुआ है, जिसके आधार पर किलोग्राम का वजन तय किया गया है. इकाइयों की अंतरराष्ट्रीय प्रणाली, या इंटरनेशनल सिस्टेम ऑफ युनिट्स (एसआई) में यह एकमात्र मानक है, जिसका आधार कोई ठोस वस्तु है. लेकिन पिछले सौ सालों में किए गए परीक्षणों से पता चला है कि इस टुकड़े के भार में संभवतः 50 माइक्रोग्राम का फर्क आ गया है. 50 माइक्रोग्राम, या बालू के एक कण के भार के बराबर.

सोमवार से ब्रिटेन की विज्ञान अकादमी रॉयल सोसायटी में वैज्ञानिकों की बैठक शुरु हुई है, जिसमें किलोग्राम के नए मानक के सिलसिले में हुई प्रगति पर विचार किया जाएगा. इसके नए आधार के रूप में क्वांटम फिजिक्स के बुनियादी स्थिर कारक प्लांक कॉन्स्टैन्ट को लिया जा रहा है. बीआईपीएम के फिजिसिस्ट माइकेल स्टॉक ने एक वक्तव्य में कहा है कि वैज्ञानिकों के बीच इस पर सहमति हो चुकी है कि प्लांक कॉन्स्टैन्ट के आधार पर निकट भविष्य में किलोग्राम का भार तय किया जाएगा.

स्टॉक ने बताया कि इलेक्ट्रिकल और मेकनिकल उर्जा के नापों की तुलना के जरिये इस समय मात्रा और प्लांक कॉन्स्टैन्ट के बीच संबंध स्थापित करने के लिए कोशिशें की जा रही हैं. आपसी सहमति के आधार पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्रयोगशालाओं में इस सिलसिले में प्रयोग जारी हैं, और उनके परिणाम आने के बाद ही किलोग्राम की नई परिभाषा तय की जा सकेगी.

इकाइयों की अंतरराष्ट्रीय प्रणाली एसआई सारी दुनिया में विज्ञान और व्यापार के क्षेत्र में नापजोख की सबसे प्रचलित प्रणाली है. इसमें शामिल हैं मीटर, किलोग्राम, सेकंड, अम्पीयर, केलविन, कैंडेला और मोल. 17वीं शताब्दी में फ्रांस में इसकी शुरुआत हुई थी और 1960 में स्टैंडर्ड मेट्रिक प्रणाली के रूप में इसे सारी दुनिया में स्वीकार किया गया. हालांकि अमेरिका और ब्रिटेन में अब भी गैलन या पौंड जैसी इकाइयां प्रचलन में हैं.

मीटर के लिए भी पहल प्लैटिनम और इरिडियम से बनी दो लाइनों के बीच की दूरी को नमूने के तौर पर रखा गया था. इस बीच प्रकाश की गति के आधार पर इसकी परिभाषा तय की गई है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उ भट्टाचार्य

संपादन: आभा एम

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