1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

ग्लोबल सिटी रैंकिंग में फिसड्डी मुंबई और दिल्ली

दिल्ली और मुंबई राजनीति और कारोबार के लिहाज से भले ही खबरों के केंद्र में रहते हों, लेकिन ग्लोबल सिटी रैंकिंग में उन्हें 45वां और 46 स्थान ही मिल पाया है. न्यूयॉर्क, लंदन और टोक्यो टॉप पर हैं.

default

65 शहरों की इस सूची में पाकिस्तान का सिर्फ एक शहर कराची शामिल है जिसे 60 वें स्थान पर रखा गया है. वहीं कोलकाता को 63वां और ढाका को 64वां स्थान दिया गया है. चीन की राजधानी पेइचिंग इस सूची में 15वें पायदान पर है.

एटी कीर्ने और ग्लोबल अफेयर्स पर शिकागो परिषद के साथ मिलकर मशहूर फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने यह सूची जारी की है. इस मैगजीन का कहना है, "21वीं शताब्दी में अमेरिका, चीन, ब्राजील या भारत का दबदबा नहीं रहेगा बल्कि दबदबा शहरों का होगा. ग्लोबल शहरों में टॉप टेन में कई शहर एशिया के हैं (हालांकि न्यूयॉर्क और लंदन अब भी ऊपर हैं). वहीं तेजी से बढ़ते कई शहर सूची में एकदम नीचे हैं. इससे साबित होता है कि स्मार्ट होने से बड़ा होना आसान है."

ग्लोबल शहरों की इस फेहरिस्त में पेरिस और हांगकांग को चौथी और पांचवीं जगह मिली है जबकि शिकागो छठे नंबर पर है. इसके बाद लॉस एंजेलिस (7), सिंगापुर (8), सिडनी (9), सिओल (10), ब्रसेल्स (11), सैन फ्रांसिस्को (12), वॉशिंगटन (13) और टोरंटो (14) का नंबर है.

लेकिन ग्लोबल सिटी का मतलब क्या है. यह तो निश्चित है कि ग्लोबल सिटी का बड़े आकार से कोई लेना देना नहीं है. अगर आकार के हिसाब से वैश्विक शहरों की सूची बनती, तो कराची (60), लागोस (59) और कोलकाता (63) पहले नंबरों में होते. ग्लोबल सिटी तय की जाती है कि शहर से बाहर हो रही घटनाओं के प्रति उसका कितना झुकाव है. वह शहर वैश्विक बाज़ार के साथ कितना तालमेल रखता है, ग्लोबल मार्केट, संस्कृति और रचनात्मता पर उसका क्या प्रभाव है.

इस सूची में पहले दस शहर किसी न किसी देश की राजधानी हैं. वहीं अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन 13वें पर, चीनी राजधानी पेइचिंग 15वें, जर्मन राजधानी बर्लिन 16वें और रूसी राजधानी मॉस्को 25वें नंबर पर है. सूची में लंदन दूसरे नंबर पर है.

रिपोर्टः पीटीआई/आभा एम

संपादनः ए कुमार

DW.COM