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ताना बाना

ग्रीस ने गिराया यूरो और बाज़ार

गर्मी का मौसम ग्रीस में पर्यटन और ख़ुशी का मौसम होता है लेकिन इस बार देश में हिसंक विरोध प्रदर्शनों की आग भड़की हुई है. बुधवार को हिंसा में एक गर्भवती महिला सहित तीन लोगों की मौच हो गई.

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, यूरोपीय संघ की सहायता के बावजूद लेकर बाज़ार में विश्वास नहीं पनप रहा है कि ग्रीस अपने कर्ज़ चुका पाएगा. इस कारण दुनिया भर के बाज़ार नीचे की तरफ जा रहे हैं. बुधवार को यूरो 14 महीने के सबसे निचले स्तर पर जा गिरा. कभी 65 रुपये का भाव पाने वाला यूरो अब 58 रुपये तक आ गिरा है. बाज़ार में यह भी डर फैला हुआ है कि ग्रीस अगर कर्ज़ नहीं चुका पाया तो इसका सीधा असर यूरोप की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा जो पहले से ही कमज़ोर पाए पर खड़ी हैं.

इस बात पर भी संदेह किया जा रहा है कि भारी बचत के वादों को ग्रीस पूरा नहीं कर पाएगा जबकि एथेंस ने प्रतिज्ञा की है कि भले ही राजनीति को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़े वह पीछे नहीं हटेगा. देश की रेटिंग करने वाली एजेंसी मूडीस ने चेतावनी दी है कि पुर्तगाल की हालत भी ख़राब हो सकती है.

Gewaltsame Ausschreitungen in Athen Griechenland NO-FLASH

उग्र प्रदर्शन

सरकार के दावे कुछ भी हों लेकिन ग्रीस के लोग कड़े आर्थिक कदमों से नाराज़ हैं और हिंसक भीड़ के रूप में सड़कों पर हैं. सरकारी कर्मचारी हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि सरकार के बचत कार्यक्रम से उन्हें सबसे ज़्यादा नुकसान होने जा रहा है. जो लोग ग्रीस को इस हालत में लाने के ज़िम्मेदार हैं उन पर करों, आय में कटौती का कोई असर नहीं होगा. आम लोग इसी वजह से झल्लाए हुए हैं. बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाककर्मियों पर पेट्रोल बम फेंके और एक बैंक के सहित कई इमारतों में आग लगा दी. इन उग्र प्रदर्शनों में एक गर्भवती महिला सहित तीन लोग मारे गए.

फिर गिरे बाज़ार

वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण इन दिनों बाज़ार कुछ संभल ही रहा था कि ग्रीस की वित्तीय संकट ने एक बार फिर दुनिया भर में बेचैनी फैला दी है. आग में घी का काम रही है रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्टें जो कुछ दूसरे यूरोपीय देशों के लिए चेतावनियां जारी कर रही हैं. क्या यूरो इस झटके को सहन करने में समर्थ है. यूरोप के अधिकतर देशों में विकास की दर या तो शून्य के आसपास है या फिर मायनस में है ऐसी स्थिति में क्या सामाजिक, व्यापारिक स्तर पर यूरोप, ख़ास कर यूरो ज़ोन के देश आर्थिक अस्थिरता को झेल सकेंगे. यह अब एक बड़ा सवाल है.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

संपादनः ओ सिंह

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