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विज्ञान

ग्रीन पुलिस रोकेगी प्रदूषण

भारत सरकार प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए ग्रीन पुलिस बनाने जा रही है. इसका काम प्रदूषण को मापना और पानी में खतरनाक रासायनिकों को बहाए जाने से रोकना है. औद्योगिक विकास के दौर में प्रदूषण बड़ी समस्या है.

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बंदरगाह, मछली पालन और पारिस्थितिकी मंत्री कृष्णा पालेमार ने बताया कि हर जिले में लगभग दो ग्रीन पुलिसकर्मी होंगे. वह शनिवार को बैंगलोर में कर्नाटक राज्य प्रदूषण बोर्ड, बैंगलोर जल आपूर्ति और निकासी बोर्ड (बीडब्लूएसएसबी) और झील विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे.

कर्नाटक में अलग अलग कुल 40 हजार उद्योग हैं जिन में 46 को जल अधिनियम के तहत बंद किए जाने के निर्देश दिए गए हैं. ज्यादातर रंगाई का काम करने वाली इन औद्योगिक इकाइयों को निगरानी के दौरान जल प्रदूषण का दोषी पाया गया. गंदे पानी को जल स्रोतों में बहाने के लिए बीडब्लूएसएसबी के खिलाफ तीन आपराधिक मामले और शहर नगर पालिका परिषद और कस्बा नगर पालिका परिषद के खिलाफ 10 मामले दर्ज किए गए.

सरकार ने हाल ही में दस ग्रीन पुलिसकर्मी तैनात किए जिनमें से दो लोगों को उत्तर कन्नडा जिले के गोकर्ण, मुर्देश्वर, बानावासी, यान और ओम बीच जैसे अहम पर्यटन केंद्रों पर तैनात किया गया. वैसे गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत जैसे देश में जहां लोग प्रदूषण की ज्यादा परवाह नहीं करते, दो ग्रीन पुलिसकर्मी कितने कारगर साबित हो पाएंगे. बड़े उद्योग धंधों की वजह से जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या के तौर पर भरा है. हाल ही में मुंबई के तट पर दो जहाजों की टक्कर से हजारों बैरल तेल समंदर में बह गया.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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