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दुनिया

ग्रीक संकट ने बढ़ाई भारत की चिंता

ग्रीक संकट के गंभीर होने की वजह से भारत में भी चिंताएं बढ़ने लगी हैं. सरकार ने भले ही भरोसा दिलाया है लेकिन उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था भी अछूती नहीं रहेगी.

इस संकट के गहराने के साथ ही सोमवार को बंबई शेयर बाजार का सूचकांक शुरूआती कारोबार में 600 अंक नीचे चला गया. बाद में हालात में सुधार जरूर हुआ. लेकिन इसमें और गिरावट का अंदेशा बना हुआ है. केंद्रीय वित्त सचिव राजीव महर्षि कहते हैं, ग्रीक संकट से घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. भारतीय शेयर बाजारों में आई गिरावट के बारे में उनका कहना है कि वह इस बारे में वह रिजर्व बैंक से संपर्क में हैं और स्थिति की समीक्षा की जा रही है.

लेकिन साथ ही महर्षि ने यह भी स्वीकार किया है कि इसका परोक्ष असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. उनका कहना है कि ग्रीक संकट के चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपनी पूंजी निकाल सकते हैं और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व बैंक के साथ विचार-विमर्श कर रही है. उनके मुताबिक यूरोपीय बाजारों में निवेशकों का रुझान बढ़ने और भारतीय बाजारों से पूंजी निकालने के चलते परोक्ष असर देखने को मिल सकता है.

वित्त सचिव का कहना है कि यूरोप में ब्याज दरें बढ़ सकती है और ब्याज दरों की बढ़ोतरी से भारत से पूंजी निकासी पर काफी दबाव पड़ सकता है. जितना असर यूरो पर होगा, उतना ही परोक्ष असर भारत पर भी होगा. चिंता की बात यह है कि भारतीय निर्यात की स्थिति इस वर्ष पहले की तरह मजबूत नहीं नजर आ रही है. ऐसे में अगर यूरोप में संकट बढ़ता है तो निर्यात के मोर्चे पर हालात और बिगड़ सकते हैं. इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

दूसरी ओर विशेषज्ञों का भी कहना है कि इस संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की वजह से भारत पर असर तो होगा, लेकिन वह कोई खास नहीं होगा. उनके मुताबिक, इससे भारतीय रुपए में अस्थिरता देखने को मिल सकती है. अगर ग्रीक को राहत नहीं मिलती है तो उसके बांड में निवेश करने वालों के पैसे डूबेंगे और उसका असर व्यापक होगा. विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरा-तफरी मचती है तो निफ्टी लुढ़क कर 7600-7700 के स्तर तक आ सकता है, जो एक गंभीर स्थिति होगी.

उधर, व्यापारिक संगठन एसोचैम ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रीस पर सीधे निर्भर नहीं है. लेकिन अगर ग्रीस कर्ज अदायगी में नाकाम रहता है तो पूरे यूरोप के लिए संकट पैदा हो सकता है. वैसी स्थिति में बाकी दुनिया के साथ भारत पर भी इसका असर पड़ना लाजिमी है. एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डीएस रावत का कहना है कि अपने विदेशी मुद्रा भंडार की वजह से भारत ग्रीक संकट से उपजे किसी भी दबाव का सामना करने में सक्षम है. बावजूद इसके पल-पल बदलते हालात चिंताजनक तो हैं ही. केंद्र सरकार की सफाई के बावजूद हकीकत यह है कि पूरी सरकार, रिजर्व बैंक और उद्योग-व्यापार जगत बेहद चिंता के साथ ग्रीक संकट की लगातार गहराती गंभीरता पर करीबी निगाह रख रहा है.

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