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जर्मन चुनाव

गैस पीड़ितों के लिए कुछ करना चाहते हैं महिंद्रा

भोपाल गैस त्रासदी मामले में यूनियन कार्बाइड इंडिया के पूर्व चेयरमैन केशुब महिंद्रा ने कहा है कि वह भोपाल गैस पीड़ितों के लिए कुछ करना चाहते हैं. महिंद्रा और चार अन्य आरोपियों को भोपाल की एक अदालत ने जमानत दे दी है.

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अदालत के बाहर पत्रकारों के साथ बातचीत में केशुब महिंद्रा ने कहा कि वह सालों के साथ गैस पीड़ितों के लिए कुछ ठोस करना चाहते हैं. "मैं पिछले 20 साल से कह रहा हूं कि मेरी इच्छा है कि गैस पीड़ितों के लिए कुछ किया जाए." पिछले 25 सालों से भोपाल गैस पीड़ित न्याय के इंतजार में है और अब गैस लीक मामले में दोषी पाए गए केशुब महिंद्रा ने मदद करने की बात कही है.

महिंद्रा के मुताबिक गैस हादसे में उन पर लगे आरोपों को वह स्वीकार नहीं करते हैं. महिंद्रा का कहना है कि प्रधानमंत्री ने एक व्यापार समिति का गठन किया था जिसमें उन्हें शामिल किया गया लेकिन उसमें बने रहने को सही न मानते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

आरोपियों में शामिल यूसीआईएल के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर विजय गोखले, पूर्व उपाध्यक्ष किशोर कामदार, पूर्व मैनेजर जे मुकुंद और पूर्व प्रोडक्शन मैनेजर एसपी चौधरी को अदालत ने जमानत दे दी है. इससे पहले सात जून को सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषियों ने जमानत के लिए अपील दायर की थी. कोर्ट के फैसले में आठ आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें दो दो साल की सजा और एक लाख जुर्माने की सुनाई थी लेकिन इतनी कम सजा के खिलाफ लोगों में भारी रोष था.

भोपाल गैस हादसे को 25 साल बीत चुके हैं और पीड़ित इंसाफ की एक लंबी लड़ाई लड़ चुके हैं. जून में अदालत का फैसला आने के बाद पीड़ितों ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए प्रदर्शन शुरू किए.

देश में इस बात पर भी बहस छिड़ गई कि यूनियन कार्बाइड प्रमुख वॉरेन एंडरसन को किन परिस्थितियों में और किसने भारत से जाने की अनुमति दी थी. इसके बाद गठित मंत्री समूह ने पीड़ितों के लिए 1500 करोड़ रुपये के मुआवजे और एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिशें शुरू करने की सिफारिश की जिसे सरकार ने मान लिया है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: आभा एम

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