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दुनिया

"गैर जिम्मेदार निकला कप्तान"

दक्षिण कोरिया में पिछले हफ्ते हुई नौका दुर्घटना में चार और लोगों को हिरासत में लिया गया है. राष्ट्रपति का कहना है कि नौका के कप्तान और चालक दल की करतूत "हत्या जैसी" है. हादसे में सैकड़ों बच्चे मारे गए.

बुधवार को हुई दुर्घटना के सिलसिले में नए सबूत सामने आए हैं, जिससे पता चला है कि चालक दल को निर्णय लेने में मुश्किल हो रही थी. इसके कुछ समय बाद 6825 टन वजनी नौका सेवोल डूब गई, जिसमें 64 लोगों की मौत हो गई और 234 लोगों का अब भी पता नहीं है.

राष्ट्रपति पाक गुन ये ने कहा, "कप्तान और कुछ चालक सदस्यों की कार्रवाई ठीक नहीं थी, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और यह हत्या के बराबर है." पाक ने कहा, "न सिर्फ मेरा हृदय, बल्कि सभी दक्षिण कोरियाई नागरिकों के हृदय टूट गए हैं. हमारे दिलों में निराशा और गुस्सा है." पाक ने मुसाफिरों के रिश्तेदारों से मुलाकात की. नौका में ज्यादातर बच्चे सवार थे. रिश्तेदारों का कहना है कि बचाव का काम ठीक ढंग से शुरू नहीं किया गया.

बर्बाद 40 मिनट

राष्ट्रपति पाक का कहना है कि कप्तान ली जून सीयोक ने नौका खाली करने का आदेश देने में काफी वक्त लगाया और उसके बाद जब स्थिति खराब होने लगी तो ज्यादातर मुसाफिरों को छोड़ कर अपने चालक दल के साथ भाग गया. राष्ट्रपति ने कहा, "इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती. कानूनी तौर पर भी और नैतिक तौर पर भी." कप्तान ली को शनिवार को गिरफ्तार किया जा चुका है. सोमवार को एक इंजीनियर सहित चार लोगों को हिरासत में लिया गया. इन सब पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है.

सेवोल नौका और नौपरिवहन ट्रैफिक कंट्रोल के आखिरी रेडियो संदेश जारी किए गए हैं, जिनमें पता चल रहा है कि नौका पर अनिश्चितता की स्थिति थी. करीब 40 मिनट तक लोगों को पता नहीं था कि क्या करना है और दक्षिण कोरिया के कई अखबारों ने पहले पन्ने की हेडलाइन बनाई है, "बर्बाद हुए कीमती 40 मिनट". कप्तान ली का कहना है कि वह मुसाफिरों के हित में काम कर रहा था क्योंकि उसे डर था कि लोग डूब जाएंगे.

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गुस्से में रिश्तेदार

बच्चों के घर मातम

हादसे के पांच दिन बाद किसी के बचे होने की संभावना कम हो गई है. लेकिन रिश्तेदार नहीं चाहते कि गोताखोरों का काम होने तक नौका को भारी क्रेन से सीधा किया जाए. तटरक्षकों का कहना है कि कई लोग अब भी नौका में फंसे हो सकते हैं. नौका में कुल 476 लोग थे, जिनमें से 352 बच्चे छुट्टियां मनाने जेजू द्वीप जा रहे थे.

यह देश की सबसे भीषण त्रासदियों में गिनी जा रही है. बच्चों के मां बाप जिन्दो द्वीप के पास जमा हैं और जब सब्र का बांध टूट जाता है, तो दहाड़ें मार कर रोने लगते हैं. बीच बीच में सफेद कपड़े में लिपटी कोई लाश डूबी हुई नौका से निकाली जाती है. उसे संभाल कर स्ट्रेचर पर रखा जाता है और वर्दीधारी छह पुलिसवाले उसे फिर ले जाते हैं.

पास के एक तंबू में रिश्तेदारों के लिए कामचलाऊ बंदोबस्त किए गए हैं, जहां वे अपने परिजनों को पहचानते हैं. हर पहचान के बाद जो चीख निकलती है, वह दिल में एक नया जख्म कर देती है और पता नहीं यह सिलसिला कब तक चले.

एजेए/एमजे (एएफपी)

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