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दुनिया

गूगल ने रूस पर लगाया गड़बड़ी का आरोप

गूगल की मानें तो उसके पास सबूत हैं जो बताते हैं कि रूस के इंटरनेट ऑपरेटर्स ने पिछले साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों के दौरान गलत जानकारी फैलाने के लिए उसका इस्तेमाल किया.

इंटरनेट सर्च इंजन गूगल के मुताबिक कंपनी के पास ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि रूसी ऑपरेटर्स ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में, हस्तक्षेप की मंशा से हजारों डॉलर खर्च कर तमाम राजनीतिक विज्ञापन दिये थे. गूगल से जुड़े एक सूत्र ने वॉशिंगटन पोस्ट और रॉयटर्स को बताया कि कंपनी, रूसी प्रशासन की ओर से सिस्टम के दुरुप्रयोग और गलत जानकारी फैलाने के प्रयासों की जांच कर रही थी. गूगल के प्रवक्ता के मुताबिक, "कंपनी शोधकर्ताओं और अन्य कंपनियों के साथ मिलकर सिस्टम के दुरुपयोग की जांच में लगी हई थी, जिसके बाद ये तथ्य सामने आये हैं." उन्होंने कहा कि गूगल ऑनलाइन दुनिया की बड़ी विज्ञापन कंपनी है जिसकी विज्ञापन नीति राजनीतिक और जातिगत मसलों पर एकदम साफ है और वह ऐसी चीजों का समर्थन नहीं करती.

गूगल के पहले फेसबुक ने भी कहा था कि रूसी इंटरनेट एजेंसियों ने पिछले साल 3000 टारगेटिड विज्ञापन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने के इरादे से खरीदे थे. हालांकि गूगल के सूत्रों के मुताबिक जिन विज्ञापनों को जीमेल, यूट्यूब, और इसके डबल क्लिक एड नेटवर्क पर दिये गए थे, उन्हें उस कंपनी ने नहीं खरीदा, जिसने फेसबुक पर टारगेटिड विज्ञापन खरीदे.

ट्रोल और फेक पोस्ट का सहारा

फेसबुक समेत टि्वटर ने भी रूसी ऑपरेटर्स पर आरोप लगाया कि उसके विज्ञापनों को सेंट पीटर्सबर्ग की इंटरनेट रिसर्च एजेंसी ने खरीदा जिसे रूसी प्रशासन से मान्यता मिली हुई है. कानून निर्माताओं और शोधकर्ताओं के मुताबिक कंपनी ने अमेरिकी और यूरोपीय लोगों को ऐसी सोशल पोस्ट पहुंचाने के लिये ट्रोल और फेक पोस्ट का सहारा लिया है. ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन के मुताबिक गलत सूचना पहु्ंचाने के इस रूसी एजेंडे में अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को खासतौर पर निशाना बनाया गया. हालांकि अब माइक्रोसॉफ्ट ने भी इस दिशा में जांच की बात कही है ताकि कंपनी यह पता लगा सके कि कहीं उसे तो निशाना नहीं बनाया गया.

फेसबुक ने विज्ञापन से जुड़ी सभी सामग्री को जांचकर्ताओं को सौंप दिया है जो राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित हस्तक्षेप और रूसी अधिकारियों व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच सांठगांठ की जांच कर रहे हैं. सभी तीन इंटरनेट कंपनियों के प्रतिनिधियों के 1 नवंबर को अमेरिकी सीनेट की खुफिया समिति के समक्ष उपस्थित होने की उम्मीद है. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में इन इंटरनेट कंपनियों की भूमिका पर कई बार सवाल उठाये जा चुके हैं. हालांकि गूगल ऐसी पहली कंपनी है जिसने सरे आम ऐसी गड़बड़ी की बात स्वीकारते हुए खुफिया समिति के समक्ष उपस्थिति के लिए हामी भरी है.

एए/आईबी (रॉयटर्स, एएफपी)

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