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दुनिया

गूगल की यूरोप में मुश्किलें

दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी गूगल को यूरोप में कई तरह के मुकदमों से गुजरना पड़ रहा है. यूरोप में गूगल की तूती उस तरह नहीं बोलती, जैसी अमेरिका और भारत में. क्या है इसकी वजह.

यूरोप के अंदर प्रतियोगिता और मार्केटिंग के अलावा निजता के नियम भी बहुत सख्त हैं और इन्हें मुद्दों पर गूगल फंसता है.

एंड्रॉयडः यूरोपीय कमीशन ने गूगल के एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम की जांच शुरू कर दी है. दुनिया भर के 80 फीसदी फोनों में यही सिस्टम लगा है. यूरोप में जांच हो रही है कि क्या वह प्रतियोगियों के खिलाफ गलत तरीके अपना रहा है.

सर्चः चार साल पहले यूरोपीय कमीशन की एक जांच में पता चला कि गूगल सर्चइंजन में अपने उत्पाद की मार्केटिंग के लिए छेड़ छाड़ करता है और अपने नतीजों को सबसे ऊपर रखता है. इसके बाद आदेश दिया गया कि उसे तीन दूसरे सर्चइंजन के नतीजे भी दिखाने होंगे. लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसमें गूगल के खिलाफ सही तौर पर सख्ती नहीं बरती गई.

भूलने का अधिकारः गूगल ने उन आवेदनों पर कोई काम नहीं किया, जिसके तहत हजारों लाखों यूजरों ने उनके सर्च नतीजे मिटाने का अनुरोध किया था. मई में यूरोप की सबसे बड़ी अदालत ने गूगल को आदेश दिया था कि उसे यूजरों के सर्च भुलाने होंगे.

यूजर डाटाः इटली के डाटा प्रोटेक्शन प्राधिकरण ने गूगल को 18 महीने का वक्त दिया है कि वह जिस तरह यूजरों के डाटा रखता है, उसे बदले. गूगल ने कुछ दिनों पहले अपने निजता के नियमों को बदला था, जिसके आधार पर वह यूजरों के डाटा का ज्यादा इस्तेमाल कर सकता है.

टैक्सः ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एप्पल, गूगल और अमेजन जैसी कंपनियों के खिलाफ सख्ती से टैक्स वसूलने पर जोर दिया है. गूगल कह चुका है कि वह जिस देश में काम करता है, वहां के टैक्स नियमों का पालन करता है.

एजेए/एएम (रॉयटर्स)

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