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मनोरंजन

गुलाबी रंग को चुनौती

रंग विविधता के लिए हैं, लेकिन यह पहचान भी तय करते हैं. बच्चों के खिलौनों से लेकर बड़ों की किताबों तक हर जगह रंग है और इन्हीं के सहारे कोई हमसे मनमानी करवा रहा है. जर्मनी का एक संगठन उसे चुनौती दे रहा है.

रंगों की भाषा होती है लेकिन इस भाषा की आवाज कितनी प्रबल है अकसर इसका अहसास नहीं होता. गुलाबी रंग लड़कियों के लिए और नीला रंग लड़कों का कब और कैसे बन गया किसी को पता नहीं, लेकिन थोड़ा ठहर कर देखें तो यह आशंका भी उठती है कि कहीं कोई खास मंशा तो नहीं इसके पीछे.

लड़कियों का रंग गुलाबी

बच्चों के खिलौनों का रंग बहुत हद तक इस बात से तय होता है कि यह लड़के के लिए है या लड़की के लिए. खिलौना बनाने वालों को गुलाबी रंग खूब भाता है. कोलोन के मायर्शे बुकस्टोर में अपने पीछे शेल्फ की ओर इशारा करते हुए आना शुल्टे कहती हैं, "ये गुलाबी साम्राज्य है.'' शेल्फ में गुलाबी रंग के हर शेड्स में छोटे सूटकेस, स्क्रैपबुक, पानी की बोतल, किताबें, गहनों के डब्बे, कलमें और दूसरी तमाम चीजें भरी हुई हैं. हर चीज पर प्रिंसेस लिलिफी की तस्वीर बनी है जो जर्मनी में आठ साल तक की बच्चियों की लाडली है.

बड़े लोग अक्सर इन चीजों को अलग से छोटे तोहफे के रूप में खरीदते हैं या फिर बच्चे इन्हें खुद ही चुन लेते हैं. शहर में किताबों की सबसे बड़ी दुकान पर दिन भर में कितनी बार प्रिंसेस लिलिफी काउंटर के पार जाती है इस बारे में शुल्टे ने साफ साफ नहीं बताया. बस इतना ही कहा, "वास्तव में कई बार." गुलाबी शेल्फ के बगल में ही लड़कों को लुभाने के लिए श्पीगलबुर्ग के सामान हैं जिनका नीला रंग और समुद्री डाकुओं की थीम दूर से नजर आ जाती है. श्पीगलबुर्ग बच्चों के किताब छापने वाली एक बड़ी कंपनी है.

कभी लड़कों का रंग था

जर्मनी में आज लड़कियों को गुलाबी और लड़कों को नीले रंग में भले ही बांट दिया गया हो लेकिन यह बंटवारा बहुत पुराना नहीं है. सम्राट विल्हेम (1879-1888) के युग में यह बंटवारा एकदम उल्टा था. पिंकस्टिंक्स संगठन में लिंग पर रिसर्च कर रही स्टेफी श्मीडेल बताती हैं कि प्रशिया की सेना की वर्दी रॉयल लाल रंग में रंगी जाती थी और तब गुलाबी रंग लड़कों के लिए तय था. 1930 में अमेरिकी टेक्सटाइल कंपनियों ने मौजूदा व्यवस्था की नींव डाली और फिर लड़कियों की ड्रेस गुलाबी और लड़कों के कपड़े हल्के नीले होने लगे.

पिंकस्टिंक्स हैम्बर्ग का एक संगठन है जो युवा लड़कियों के लिए कोई खास रंग तय करने वाले सामानों, मीडिया और बाजार की गतिविधियों को निशाना बनाता है. संगठन का कहना है कि लड़कियों को गुलाबी रंग से अलग होने की आजादी मिलनी चाहिए. स्टेफी श्मीडेल प्रिंसेस लिलिफे जैसी तस्वीरों की भी आलोचना करती हैं. उनका कहना है इनके जरिये लड़कियों को बताया जाता है कि उन्हें कैसा होना चाहिए. श्मीडेल ने कहा, "वह घोड़ों को खिलाती है लेकिन खुद कभी कुछ नहीं खाती. निश्चित रूप से डॉक्टर और पायलट बार्बी डॉल भी हैं लेकिन वो बिकती नहीं हैं."

किताबों की दुकानदार आना शुल्टे खिलौनों में गुलाबी रंग के ज्यादा इस्तेमाल पर कहती हैं, "आज लड़कियों को लड़की होने और इसे दिखाने की आजादी है." उनका कहना है 1980 के दशक की तुलना में अब यह फिर सामाजिक रूप से स्वीकार्य है.

पिंकस्टिंक्स पुरानी छवियों के खिलाफ लड़ रहा है. संगठन का कहना है कि बच्चों के खिलौनों ने एकदम से छोटे बच्चों को भी अपना लक्ष्य बना लिया है. श्मीडेल के मुताबिक "कुछ खास रंग उनकी खपत बढ़ाते हैं." श्मीडेल ने यह भी बताया कि यह दुनिया भर में हो रहा है, केवल जर्मनी या यूरोप में ही नहीं, "हमें अर्जेंटीना और ब्राजील से भी खत मिलते हैं."

नुकसानदेह संदेश

आठ साल तक की लड़कियों के लिए बाजार में स्टेशनरी सामानों के एक संग्रह के साथ रियलिटी शो जर्मनी की अगली टॉप मॉडल को जोड़ने को श्मीडेल खासतौर से धोखाधड़ी मानती हैं. इस शो की जूरी में जर्मन फैशन मॉडल हाइडी क्लुम भी शामिल थीं और इसमें हिस्सा लेने वाली लड़कियों के बीच फैशन मॉ़डल का एक करार पाने के लिए मुकाबला था. 2006 में यह शो शुरू हुआ और बायर मीडिया की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले से श्मीडेल कहती हैं, "70 फीसदी जर्मन लड़कियों ने खुद को खूबसूरत सोच लिया." केवल 47 फीसदी लड़कियां ही ऐसी थी जिन्होंने अपने को बहुत मोटा नहीं माना. डब्ल्यूएचओ की तरफ से बीलेफेल्ड यूनिवर्सिटी की इसी तरह की एक रिसर्च से साबित हुआ कि इस तरह के शो देखने वाली छोटी बच्चियों के मन में यह बात बैठ गई कि उन्हें शो के उम्मीदवारों की तरह दिखना चाहिए. इन उम्मीदवारों को जूरी बार बार अहसास दिलाती थी कि उन्हें साइज 2 ही पहनना चाहिए.

पिंकस्टिंक्स ग्रुप में काम कर रहे लोगों में करीब एक तिहाई पुरुष हैं. ग्रुप चाहता है कि बच्चों के खिलौने बहुपयोगी हों. श्मीडेल का मानना है कि लड़कियों के खिलौनों में जहाज और और लड़कों के खिलौनों में गुड़िया शामिल हो. उनका कहना है कि बहुत से बच्चे तय मान्यताओं के आधार पर उसी माहौल में बड़े होते हैं जबकि कुछ मां बाप इस माहौल को चुनौती दे रहे हैं.

कोलोन में किताबों की दुकानदार आना शुल्टे भी कहती हैं कि बड़े लोग भी नीले और गुलाबी रंगों में बंटे हुए हैं. प्रिंसेस लिलिफी के गुलाबी साम्राज्य के बगल में ही रोमांटिक उपन्यासों की शेल्फ है और ज्यादातर के कवर गुलाबी रंग के एक खास शेड में हैं.

रिपोर्टः कैटरीन श्लूजेन/एनआर

संपादनः आभा मोंढे

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