1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

खेल

गिब्स की किताब का एक और खुलासा

दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर हर्शल गिब्स की आत्मकथा मधुमक्खी का छत्ता बन गई है, हाथ डालते ही डंक मारने मधुमक्खी बाहर आती है. उन्होंने पूर्व दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोन्ये की मैच फिक्सिंग के बारे में भी काफी कुछ लिखा है.

default

हर्शल गिब्स

टु द पॉइंट नाम की इस किताब गिब्स लिखते हैं कि क्रोन्ये ने 1996 उनसे भारत में एक मैच फिक्स करने को कहा था. हालांकि गिब्स साथ ही यह भी लिखते हैं कि क्रोन्ये एक ऐसे इंसान हैं जिनकी वह हमेशा इज्जत करते हैं.

किताब के जिस अध्याय में गिब्स ने क्रिकेट को बदल देने वाली रात की बात की है उसका नाम दिया गया है द कॉन्ट्रोवर्सीज यानी विवाद. गिब्स उस रोज को कुछ इस तरह याद करते हैं, "सुबह के साढ़े छह बजे थे. मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई. दरवाजा खोला तो सामने हमारे कप्तान हैंसी क्रोन्ये खड़े थे. यह बात 2000 की है. हम नागपुर में थे. उस दिन भारत के खिलाफ सीरीज का आखिरी मैच था. मेरा रूम मेट हेनरी विलियम्स नहा रहा था. हैंसी बेड पर बैठ गए. वह सीधे मुद्दे की बात पर आ गए. उन्होंने कहाः मुझे यहां भारत में एक आदमी मिला है. जैसा वह चाहता है अगर तुम करो तो अच्छा पैसा बना सकते हो. अगर तुम आज 20 रन से कम पर आउट हो जाओ तो वह 15 हजार अमेरिकी डॉलर देने को तैयार है."

लेकिन गिब्स कहते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब क्रोन्ये ने इस तरह की बात की थी. उन्होने लिखा है, "ऐसा पहले भी हो चुका था. 1996 में जब हम भारत दौरे पर थे. उस रोज दौरे का आखिरी मैच था. मैच से पहले की रात हैंसी ने पूरी टीम को जमा किया और एक धमाका किया. उन्होंने कहा कि किसी ने उन्हें मैच हारने के बदले ढाई लाख अमेरिकी डॉलर देने की पेशकश की है."

गिब्स कहते हैं कि यह पेशकश लुभावनी थी क्योंकि टीम यूं भी इतनी कमजोर थी कि हारने ही वाली थी. लेकिन टीम ने इस पेशकश को ठुकरा दिया. गिब्स के शब्दों में, "बेशक टीम ने इस पेशकश के खिलाफ फैसला किया. हालांकि इस घटना के खिलाफ उतनी कड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई जितनी आनी चाहिए थी. हालांकि हम मैच हार गए."

इस सबके बावजूद गिब्स ने हैंसी की तारीफ की है. उन्होंने लिखा है, "मैं जिनके लिए खेला उनमें हैंसी सबसे अच्छे कप्तान थे. बेशक उनकी विरासत पर अलग तरह के बादल छाए हुए हैं लेकिन हैंसी एक ऐसे इंसान थे जिनकी मौजूदगी में कुछ खास बात होती थी."

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एन रंजन

DW.COM

WWW-Links