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दुनिया

गाजा पर इस्राएल के हमले जारी

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इस्राएल ने गाजा पट्टी पर हवाई हमले जारी रखे हैं. इस्राएली के एक तरफा हमलों की दुनिया भर में आलोचना हो रही है, लेकिन इसके बावजूद इस्राएल शांत पड़ता नहीं दिख रहा है.

पिछले एक सप्ताह से इस्राएल गाजा पर हमला कर रहा है. अब तक इनमें 172 लोगों की जान जा चुकी है और 1,230 घायल हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस्राएल से फौरन हमले रोकने को कहा है. मून ने कहा कि "बहुत सारे नागरिकों" को इस युद्ध का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. गाजा स्थित फलिस्तीनी मानवाधिकार केंद्र पीसीएचआर का कहना है कि कुल मारे गए लोगों में कम से कम एक तिहाई आम नागरिक हैं.

पिछले 24 घंटों में उत्तरी गाजा के 17,000 फलिस्तीनी अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं. हमलों से बचने के लिए इन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्कूलों में चलाए जा रहे शिविरों में रहना पड़ रहा है. एक स्कूल में रह रहे 27 साल के बेत लाहिया ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "हम क्लासरूम की टाइलों पर सो रहे हैं. लेकिन हम यहां सुरक्षित महसूस करते हैं. हालांकि हालात नाजुक हैं. यहां खाने और पानी की किल्लत है."

जिद पर अड़ा इस्राएल

इस्राएल के रक्षा मंत्री मोशे यालोन ने माना है कि हमास में काफी नुकसान हुआ है. एक बयान में उन्होंने कहा, "हमास के नेता जब अपने गुप्त ठिकानों से निकलेंगे, तो देखेंगे कि हमने किस हद तक वहां तबाही मचाई है. इसे देख कर उन्हें पछतावा होगा और वे दोबारा कभी भी हमसे जंग छेड़ने से डरेंगे."

सेना के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि इस्राएल एक 'पेन मैप' का इस्तेमाल कर रहा है. इसके तहत हमास के सबसे अहम ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है. अपना नाम ना बताने की शर्त पर इस अधिकारी ने बताया, "इस तरह से हमास एक मुश्किल स्थिति में पहुंच जाएगा और जंग खत्म होने के बाद भी उसे इससे उबरने में काफी लंबा वक्त लग जाएगा." इस्राएल की रणनीति की तारीफ करते हुए अधिकारी ने कहा, "हम उन पर जितना कड़ा वार करेंगे, उनके लिए मुश्किल उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी, उन्हें और ज्यादा वक्त लगेगा और हमारा हमला और भी ज्यादा असरदार साबित होगा."

मदद का हाथ

इस बीच सोमवार को काहिरा में अरब लीग की बैठक हो रही है जिसमें गाजा संकट मुख्य मुद्दा है. सउदी अरब ने 5.3 करोड़ डॉलर की मदद की बात की है. यह राशि गाजा में घायल लोगों के इलाज में इस्तेमाल होगी. गौरतलब है कि इस्राएल में अब तक किसी के मारे जाने की खबर नहीं है.

वहीं अमेरिका ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है. अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने रविवार को कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच संवाद कराने पर काम करना चाहता है. लेकिन क्योंकि अमेरिका का हमास के साथ कोई सीधा संपर्क नहीं है, इसलिए कतर और मिस्र के जरिए ही ऐसा संभव हो सकेगा. यूरोपीय संघ भी युद्धविराम की कोशिशों में लगा है.

आईबी/ओएसजे (एएफपी)

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