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दुनिया

गाउक की भारत यात्रा

जर्मन राष्ट्रपति योआखिम गाउक ने भारत यात्रा के दौरान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की उपलब्धियों की तारीफ की लेकिन साथ ही महिलाओं और समलैंगिकों के साथ होने वाले भेदभाव की आलोचना भी की.

भारतीय खेमे में उस समय अचानक हलचल मच गई जब नई दिल्ली में बेमौसम बरसात जर्मन राष्ट्रपति गाउक के समारोह के दौरान आ पहुंची. किसी ने छतरी की गुहार लगाई, युवा सहायक जब तक छतरी ले कर आता, तब तक गाउक हल्की बारिश का आनंद लेते हुए पत्रकारों को बता रहे थे कि वह क्षेत्र के सबसे पुराने लोकतंत्र के प्रतिनिधियों से सकारात्मक बातचीत की उम्मीद रखते हैं और उन्हें भारत आ कर बहुत खुशी हो रही है.

राष्ट्रपति एशिया में अपनी पहली राजकीय यात्रा के दौरान एक संकेत देना चाहते हैं कि जर्मनी और भारत दोनों के ही मूल सिद्धांत एक जैसे हैं. वह साथ ही अफगानिस्तान में क्षेत्रीय भूमिका के लिए भारत को श्रेय देना चाहेंगे. गाउक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बातचीत के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.

हालांकि गाउक ने भारत में समलैंगिकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की और कहा कि वह इस पर चुप नहीं रहना चाहते. इस फैसले के कारण समलैंगिकता को भारत में अपराध का दर्जा दिया गया है. उन्होंने कहा कि बातचीत में साफ हो गया है कि भारतीय राजनीति प्रगतिशील हल ढूंढ रही है जिसमें किसी एक धड़े को भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़े. महिला अधिकारों के बारे में उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीति और उसके क्रियान्वयन में बड़ा अंतर है. ऐसे भी समूह हैं जो निंदनीय तरीके से काम कर रहे हैं.

समाज से संवाद

इरमिनगार्ड शेवे गेरिक कहती हैं कि भारत में दो सच्चाइयां आपस में मिलती हैं. महिला अधिकारों के समूह टेर दे फाम की अध्यक्ष शेवे गेरिक जर्मन प्रतिनिधिमंडल के साथ हैं. वह कहती हैं कि वैसे तो संविधान ने महिलाओं को अधिकार दिए हुए हैं लेकिन समाज का बड़ा हिस्सा अभी भी मध्ययुगीन मानसिकता के साथ रहता है. इसलिए लड़कियों की शादी 14 साल में कर दी जाती है जबकि संविधान में इसकी उम्र 18 लिखी गई है. बलात्कार की कई घटनाएं हाल के दिनों में सामने आई हैं. शेवे गेरिक ने खुशी जताई कि आने वाले दिनों में गाउक भारतीय समाज के कुछ प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे.

गाउक ने भी कहा कि भारत के सक्रिय समाज और मीडिया ने एक खुली बहस शुरू की है लेकिन वह इस बात पर जोर देते हैं कि वह भारत को कुछ सिखाने या बताने नहीं आए हैं, वह इस मामले में केवल अपना सहयोग दिखाना चाहते हैं. पर्यावरण की सुरक्षा के मुद्दे पर गाउक ने कहा कि भारत की भूमिका प्रगतिशील है. जर्मनी के सहयोग से वह नवीनीकृत ऊर्जा पर जोर दे रहा है.

शुक्रवार को जर्मन राष्ट्रपति बैंगलोर जा रहे हैं. वहां वह भारतीय और जर्मन कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. इस मुलाकात में जर्मनी का दोहरा ट्रेनिंग प्रोग्राम भी एक मुद्दा रहेगा. जर्मनी का मानना है कि इससे भारत में बेरोजगारी की समस्या को कम किया जा सकता है. गाउक के मुताबिक भारत में बढ़ते युवा बेरोजगारों के लिए यह अच्छा मॉडल साबित हो सकता है. एशिया यात्रा के दौरान गाउक भारत के बाद म्यांमार जाएंगे.

रिपोर्टः नाओमी कोनराड/आभा मोंढे

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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