1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

गांधीजी के हाथ से लिखी डायरी मिली

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लिखी महात्मा गांधी की डायरी अब जल्द ही सभी लोग देख सकेंगे. अब तक गांधीजी की ये डायरी किसी के निजी संकलन में थी. अब ये गांधी नेशनल म्यूजियम को दे दी गई है.

default

एक यह छोटी सी डायरी है, जिसे बापू ने गुजराती में लिखा है. दूसरे कई पत्रों के साथ इस डायरी को अब दिल्ली के संग्रहालय में भेजा गया है. नेशनल आर्काइव्ज ऑफ इंडिया के सह निदेशक राजेश वर्मा ने बताया, "हमें गांधीजी की डायरी दूसरे दस्तावेजो के साथ दस दिन पहले मिली. ये हमें गांधी नेशनल म्यूजियम की पूर्व निदेशक वर्षा दास ने भेजी." वर्षा दास को ये डायरी और पत्र उनकी मित्र मीना जैन ने दिए थे. साथ ही महात्मा गांधी की भतीजी मनु बेन की लिखी कई डायरियां भी हैं.

Flash-Galerie Supermacht Indien - 60 Jahre demokratische Verfassung

महात्मा गांधी की डायरी लोगों के लिए

वर्षा दास ने बताया, "मैंने जुलाई के पहले सप्ताह में ये संकलन आर्काइव्ज को भेज दिया क्योंकि हम मूल डायरी और दस्तावेज म्यूजियम में नहीं रख सकते. अभिलेखागार में तापमान नियंत्रण करने की सुविधा है और डायरी के पन्नो को बचा कर रखने के लिए ये बहुत जरूरी है क्योंकि कई पेज भुरभुरे हो गए हैं."

गांधीजी की डायरी 13 अप्रैल से 29 दिसंबर 1947 के बीच लिखी गई है. गांधीजी ने इसे लिखने के लिए या तो नीली स्याही का इस्तेमाल किया है कई जगह पेन्सिल से भी उन्होंने लिखा है. दास का कहना है, "ये डायरी सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, दुनिया भर के लिए मूल्यवान है. इसे संभाल कर रखने से बापू के जीवन और उनके काम के बारे में और जानकारी मिलेगी."

गांधीजी की डायरी के अलावा उनकी भतीजी मनु बेन की लिखी 19 डायरियां भी राष्ट्रीय अभिलेखागार को दी गई हैं. डायरियों के साथ खुले पन्ने भी हैं जो बांग्ला में लिखे गए हैं. पेन्सिल से हिन्दी, उर्दू और गुजराती में नोट्स हैं. नेशनल आर्काइव्ज ने बताया, "गांधीजी की भतीजी की 19 डायरियां हैं और कई पत्र हैं, जिनमें 1944 में लिखे पत्र भी हैं जो ज़ाकिर हुसैन, इंदिरा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम के कई नेताओं को लिखे गए हैं."

Montblanc Füller Gandhi

नेशनल आर्काइव्ज में इन डायरियों और पत्रों को डिजिटलाइज किया जाएगा जिससे शोध करने वालों को फायदा होगा. राष्ट्रीय अभिलेखागार के राजेश वर्मा ने कहा कि इन दस्तावेजों को संभालने के लिए एक अलग विभाग बनाया जाएगा. वर्मा ने बताया, "गुजराती से दूसरी भाषाओं में गांधीजी की डायरी का अनुवाद अभी होना है. हम ऐसे व्यक्ति को ढूंढ रहे हैं जो गुजराती से इसका अनुवाद कर सके. इसे सार्वजनिक करने से पहले हम इसका अनुवाद कराना चाहते हैं. हालांकि जो गुजराती जानते हैं वे इस डायरी को अब भी पढ़ सकते हैं. ताकि ज्यादा लोग इसे पढ़ सकें हम इसका अनुवाद हिन्दी और इंग्लिश में करेंगे."

डायरी के अलावा 1925 में महात्मा गांधी के चेन्नई (उस समय मद्रास) यात्रा का एक एलबम भी इन दस्तावेजों में है. इस एलबम में उनके भाषण, प्रेस क्लिपिंग, 1942 का एक कैलेंडर, टेलीग्राम और कुछ गुजराती दोहे भी हैं.

रिपोर्टः पीटीआई/ आभा एम

संपादनः ए जमाल

DW.COM

WWW-Links