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दुनिया

गांधीजी का संदेश आज भी प्रांसगिकः ओबामा

महात्मा गांधी से बेहद प्रभावित अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि बापू का संदेश अब भी प्रासंगिक है. साथ ही उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सबसे अद्भुत नेताओं में से एक बताया है.

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गांधी के प्रशंसक ओबामा

बराक ओबामा ने कहा कि वह मनमोहन सिंह की दोस्ती, बुद्धिमानी और नम्रता की बहुत कद्र करते हैं. दोनों नेता कई बार मिल चुके हैं लेकिन उनकी पहली मुलाकात 20 महीने पहले लंदन में हुई. ओबामा बताते हैं, "लंदन में हमारी पहली मुलाकात के बाद से ही, मैंने पाया है कि प्रधानमंत्री और मुझमें बहुत सी बातें एक जैसी हैं. एक जैसे लक्ष्य हैं और लोगों की भलाई के लिए एक जैसी ही सोच है."

US-Präsident Barack Obama in Indien

व्हाइट हाउस में मनमोहन और उनकी पत्नी की स्वागत

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि वह और उनकी पत्नी जल्दी भारत जाने के बारे में बेहद उत्साहित हैं. वह कहते हैं, "मेरे भारत दौरे की सबसे अच्छी बातों में से एक यह है कि मैं फिर एक बार प्रधानमंत्री से मिलूंगा. मुझे और मिशेल को बेहद खुशी हुई, जब हमने व्हाइट हाउस में (एक साल पहले) मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी (गुरुशरण कौर) की मेजबानी की."

भारत से ओबामा के लगाव एक और बड़ी वजह है महात्मा गांधी और उनका दर्शन. अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि गांधी का संदेश 21वीं सदी में प्रांसगिक है. वह कहते हैं, "गांधी ने अपने जीवन का ज्यादातर हिस्सा भारत में बिताया और वहीं काम किया, लेकिन उनका संदेश आज भी पूरी दुनिया में प्रांसगिक है."

Sicherheit in Indien Gandhi heute

गांधीजी के बड़े प्रशंसक ओबामा कहते हैं, "मेरे अपने देश में गांधी ने डॉ. मार्टिन किंग लूथर को प्रभावित किया जिसकी बदौलत उन्होंने नागरिक अधिकारों के अद्भुत आंदोलन का नेतृत्व किया. गांधी का काम मेरे अपने देश में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा बना और जो मिसाल उन्होंने कायम की, मैं उसकी सराहना करता रहूंगा." ओबामा ने पिछले साल शांति का नोबेल पुरस्कार स्वीकार करते हुए भी कहा कि गांधीजी और किंग जैसे लोगों ने जिस तरह अहिंसा का प्रयोग किया, वह भले ही हर परिस्थिति में प्रासंगिक न हो, लेकिन जिस प्रेम का उन्होंने प्रसार किया, वह हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा.

ओबामा ने कहा कि उनका भारत दौरा न सिर्फ गांधीजी की स्मृति के प्रति सम्मान व्यक्त करना है, बल्कि वह उस आधुनिक भारत के बारे में और जानेंगे जिसे आकार देने में गांधीजी का योगदान रहा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एमजी

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