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ग़रीब देशों से भी ज़्यादा ग़रीब भारत में

भारत भले ही तेज़ आर्थिक विकास दर के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की आंखों का तारा हो लेकिन उसके आठ राज्यों में इतनी ग़रीबी है कि कुल ग़रीबों की संख्या अफ़्रीका के 26 सबसे ग़रीब देशों में रहने वाले लोगों से भी अधिक है.

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यह कहना है एक बहुआयामी वैश्विक ग़रीबी रिपोर्ट का. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यूएनडीपी के समर्थन से ऑक्सफ़ोर्ड ग़रीबी और मानव विकास पहलक़दमी (ओपीएचआई) ने मल्टी डाइमेंशनल पोवर्टी इंडेक्स एमपीआई का विकास किया है और उसके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है.

Pygmäen, Basua Mädchen

एमपीआई विश्लेषण के अनुसार भारत के 8 पिछड़े राज्यों बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में ग़रीबों की संख्या 42 करोड़ है जबकि अफ़्रीका के 26 सबसे ग़रीब मुल्कों में ग़रीबों की संख्या 41 करोड़ है.

ग़रीबी का नया सूचकांक एमपीआई अभाव में जीने वाले लोगों का बहुआयामी चित्र देता है. यह परिवार के स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर धन सम्पत्ति और सेवा के क्षेत्र में अभावों का मूल्यांकन करता है. इससे ग़रीबी की प्रकृति और उसके आयाम का पता चलता है.

सूचकांक निर्माताओं को उम्मीद है कि इससे विकास संसाधनों के सही इस्तेमाल में मदद मिलेगी. यह इस साल से यूएनडीपी की वार्षिक मानवीय विकास रिपोर्ट में पुराने मानवीय ग़रीबी सूचकांक की जगह ले रहा है जिसे 1997 से ही रिपोर्टों में शामिल किया जा रहा था.

यूएनडीपी की इस साल की रिपोर्ट अक्टूबर में जारी होगी लेकिन बहुआयामी सूचकांक के आंकड़े लंदन में एक पॉलिसी फोरम में जारी किए गए. इन्हें यूएनडीपी की साइट पर भी देखा जा सकता है.

ऑक्सफ़ोर्ड ग़रीबी और मानव विकास पहलक़दमी ओपीएचआई की निदेशक डा. सबीना अल्कीरे का नए सूचकांक के बारे में कहना है, "यह हाई रिजोल्यूशन लेंस की तरह है जो सबसे ग़रीब परिवारों के सामने उपस्थित चुनौतियों के विभिन्न आयामों को दिखाता है." डा. अल्कीरे ने जॉर्ज वाशिंगटन यूनीवर्सिटी के प्रो. जेम्स फ़ोस्टर और ओपीएचआई की मारिया एम्मा सांतोस के साथ मिलकर ये सूचकांक विकसित किया है.

यूएनडीपी के निदेशक और इस साल की रिपोर्ट की लेखिका डा. जेनी क्लूगमन का कहना है, "एमपीआई परंपरागत डॉलर प्रति दिन की तुलना में ग़रीबी की व्यापक तस्वीर देता है." ओपीएचआई के शोधकर्ताओं ने 104 देशों से मिली सूचनाओं का विश्लेषण किया है जहां कुल मिलाकर 5.2 अरब लोग रहते हैं. यह विश्व की आबादी का 78 प्रतिशत है.

एमपीआई के अनुसार इन देशों में 1.7 अरब लोग जो कुल आबादी का एक तिहाई है, बहुआयामी ग़रीबी में जीते हैं. अब तक सवा डॉलर प्रति दिन पर जीने वालों को अत्यंत ग़रीब समझा जाता था और इसके हिसाब से इन 104 देशों में 1.3 अरब लोग अत्यंत ग़रीब थे.

ग़रीबी को मापने का नया बहुआयामी सूचकांक मेक्सिको ने लागू कर दिया है. इस समय चिली और कोलंबिया भी इसे लागू करने पर विचार कर रहे हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: एस गौड़

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