गलतियों से सबक ले अमेरिका | ब्लॉग | DW | 10.12.2014
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ब्लॉग

गलतियों से सबक ले अमेरिका

संदिग्ध आतंकवादियों को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की यातना पर अमेरिकी सीनेट की रिपोर्ट का प्रकाशन उचित है. डॉयचे वेले के मिषाएल क्निगे का कहना है कि नकारात्मक असर के डर से इसे छुपा कर रखा जाना सही नहीं होता.

कुछ साल पहले इसकी शुरुआत दलगत हितों से ऊपर वाली पहलकदमी से हुई थी. लेकिन बाद में चलकर जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में सीआईए के यातना कार्यक्रम की सीनेट द्वारा जांच की कोशिश दलगत विवाद में बदल गई. नतीजा यह हुआ है कि कोई पक्ष प्रकाशन की चोट से बच नहीं पाया है. अच्छा होता कि अमेरिकी प्रशासन अमेरिकी नागरिकों और दुनिया को एक साझा लक्ष्य पेश करता. 11 सितंबर 2011 के हमलों के बाद अमेरिका के महत्वपूर्ण संस्थान द्वारा की गई गलतियों का विश्लेषण और उसकी जिम्मेदारी लेने का लक्ष्य. इसके बदले वाशिंगटन ने दलगत हितों का सहारा लिया. नतीजा यह हुआ है कि रिपब्लिकन पार्टी ने रिपोर्ट के प्रकाशन का विरोध तो किया ही है, वे इसके खिलाफ अभियान भी चलाएंगे. सीआईए भी अपनी दलील दे रहा है. सीनेट की खुफिया समिति की प्रमुख डाएन फाइनस्टाइन और व्हाइट हाउस पर आलोचना का बचाव करने का दबाव है.

बहस के केंद्र में हों मुद्दे

यह अफसोसजनक है क्योंकि यह असली मुद्दे से ध्यान हटाता है. रिपोर्ट के प्रकाशन पर बहस के बदले सीआईए यातना और रेंडिशन प्रोग्राम के बारे में रिपोर्ट के नतीजों और उससे मिलने वाली सीख पर बहस होनी चाहिए. आलोचकों की एक बड़ी दलील यह है कि इसका नकारात्मक असर होगा, खासकर विदेश में रहने वाले अमेरिकियों के लिए और अमेरिका की विदेश नीति के लिए. मगर अफसोसो कि उनकी ये दलीलें गलत हैं.

यह समझना जरूरी है कि रिपोर्ट के प्रकाशन की वजह से अमेरिकी नागरिकों और विदेश नीति पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. बल्कि सीआईए की यातना और रेंडिशन की कार्रवाई पर रिपोर्ट का प्रकाशन अमेरिकी विदेश नीति का रक्षक साबित हो सकता है.

यातना की जगह नहीं

ऐतिहासिक रूप से आजादी का रक्षक माने जाने वाला ग्लोबल सुपर पॉवर अमेरिका मानवाधिकारों के मुद्दे पर दूसरे देशों की आलोचना कैसे कर पाएगा, अगर वह अपने यहां की गलती के लिए उचित कदम न उठाए. बुश के शासन काल में सीआईए की गतिविधियों के कारण हुए नुकसान के बाद फिर से अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि वाशिंगटन अपनी गलतियों को माने. मगर सिर्फ विदेश नीति के आधार पर रिपोर्ट के प्रकाशन का बचाव करना भी गलत होगा. एक लोकतांत्रिक और कानून सम्मत देश में यातना के लिए कोई जगह नहीं हो सकती. सीआईए की यातना पर सीनेट की रिपोर्ट का प्रकाशन एक महत्वपूर्ण कदम है.

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