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ताना बाना

गर्भ में पता चल जाएगा डाउन सिन्ड्रोम

मंथन के नए अंक में बात होगी डाउन सिन्ड्रोम से निपटने के लिए जर्मनी में अपनाए जा रहे उपायों की और ज्वालामुखी फटने की भविष्यवाणी.

दुनिया भर में 10 लाख बच्चे डाउन सिन्ड्रोम से ग्रस्त हैं. डाउन सिन्ड्रोम वाले बच्चे आम बच्चों से थोड़ा अलग होते हैं. जर्मनी में गर्भावस्था के दौरान तकनीक की मदद से गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. डाउन सिन्ड्रोम भी इस जांच के जरिए पता लगाई जा सकती है. जर्मनी में ऐसा कानून है जो गर्भवती महिलाओं के बच्चों में डाउन सिन्ड्रोम के पता चलने पर गर्भपात की इजाजत देता है. अक्सर 90 फीसदी गर्भवती महिलाएं ऐसा पाए जाने पर गर्भपात करा लेती हैं. जर्मनी के आखेन यूनिवर्सिटी क्लीनिक में डॉक्टर पिछले डेढ़ साल से खून की जांच से प्रसव पूर्व बीमारियों का सटीक पता लगा रहे हैं. गर्भावस्था के पहले तीन महीने इन जांचों के लिए बेहद अहम होते हैं. पहले अल्ट्रासाउंड और फिर खून की जांच के जरिए डाउन सिन्ड्रोम के खतरे का पता लगाया जा सकता है. लेकिन कुछ और भी जांच हैं जो गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. जर्मनी में इन खतरनाक जांचों का विकल्प बाजार में मौजूद हैं. मंथन में आपको बताएंगे, कि किस तरह से गर्भ में गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकता है और कैसे किए जाते हैं ये टेस्ट. साथ ही इस विकल्प का विरोध क्यों हो रहा है.

जीन में बदलाव से हारेगा कैंसर

जर्मनी के हाइडेलबैर्ग में स्थित मॉलिक्यूलर बायोलॉजी की यूरोपीय प्रयोगशाला में वैसे तो कई विषयों पर अहम शोध हो रहे हैं लेकिन एक खास शोध के जरिए वैज्ञानिक जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या जीन में बदलाव से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराया जा सकता है. इस प्रयोगशाला में 2008 से इस विषय पर शोध किया जा रहा है. वैज्ञानिकों को कैंसर पर शोध करते हुए कुछ सफलता हासिल हुई है. क्या है वह सफलता है और इस प्रयोगशाला की विशेषताएं भी आपको मंथन के इस अंक में देखने को मिलेंगी.

कब फटेगा ज्वालामुखी?

ज्वालामुखी जब फटता है तो अपने साथ तबाही का सैलाब लाता है. ज्वालामुखी के अंदर से निकलने वाली गैस, लावा और छोटे कण इंसान और जानवारों के लिए काफी खतरनाक होते हैं. जर्मनी के पोट्सडाम में स्थित जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसस में वैज्ञानिक ज्वालामुखी के रहस्य जानने की कोशिश में जुटे हैं. वे कई तथ्यों और जानकारियों को जोड़ ज्वालामुखी के फटने की सटीक भविष्यवाणी करना चाहते हैं.

ऐसा करने से प्रभावित इलाके के लोगों के जान और माल को बचाया जा सकता है. कुछ मामलों में भविष्यवाणी आसान है लेकिन कुछ मामलों में वैज्ञानिक भविष्यवाणी करने में असमर्थ हैं. पोट्सडाम की हाइटेक प्रयोगशाला में लावे के साथ प्रयोग किए जाते हैं. और फिर खतरे के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाती हैं. इस दिलचस्प विषय पर मंथन में विस्तार से रिपोर्ट.

प्रकृति से डिजाइन की प्रेरणा

मंथन में आपकी मुलाकात इटली के आर्किटेक्ट मातेओ थुन से होगी जो डिजाइन के जादूगर हैं. उनकी बनाई गई डिजाइन काफी लोकप्रिय होती हैं. चाकू से लेकर बड़ी बड़ी इमारतें डिजाइन करने की प्रेरणा थुन प्रकृति से लेते हैं. थुन के लिए पर्यावरण संरक्षण अहम है. मंथन में आपको थुन और उनकी डिजाइन के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी.

देखना न भूलें, मंथन शनिवार सुबह 10:30 बजे डीडी नेशनल पर.

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