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ताना बाना

गरीबी रेखा से ऊपर वालों को मिलेगा सस्ता अनाज!

गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों पर जबरदस्त मंहगाई की मार कम करने के लिए सरकार उन्हें राशन की दुकानों पर अनाज मुहैया कराती है. अब गरीबी रेखा से ऊपर रहने वाले लोगों को भी सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराने पर विचार.

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राशन की लंबी कतारें

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा है कि गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) रहने वाले लोगों को भी यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में ला सकती है. इस योजना के तहत राशन की दुकानों में घटी दरों पर अनाज मिलना कानूनी अधिकार है.

"गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले घरों को हर महीने 30 किलोग्राम अनाज मिलता है. गरीबी रेखा से ऊपर रहने वालों को हर महीने 15 किलोग्राम अनाज देने पर विचार किया जा सकता है."

दिल्ली में एक खाद्य सम्मेलन में रंगराजन ने कहा कि इस योजना के चलते यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर घर में अनाज की कुछ मात्रा तो पहुंच रही है. यूपीए सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकार गरीब परिवारों को तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल/गेंहू मुहैया कराती है.

इस कीमत पर अनाज पाना गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वालों का कानूनी अधिकार है. गरीबी रेखा से ऊपर वाले घरों को कितना अनाज दिया जाए इस पर विचार हो रहा है. पहले 25 किलोग्राम का प्रस्ताव रखा गया लेकिन अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

वामपंथी दल सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एकरूपता लाने की मांग कर रहे हैं ताकि सस्ते अनाज को राशन की दुकानों पर एक दाम पर उपलब्ध कराया जा सके. हालांकि रंगराजन का कहना है कि एपीएल और बीपीएल घरों के लिए कीमत अलग ही होगी ताकि इससे पड़ने वाले वित्तीय बोझ से निपटा जा सके.

रंगराजन का कहना है कि एपीएल और बीपीएल में अंतर बहुत थोड़ा है इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एकरूपता की मांग करने वाले कहते हैं कि सभी घरों को इस योजना के अन्तर्गत लाना चाहिए.

आंकड़ों के अनुसार देश में गरीबी रेखा से नीचे घरों की संख्या 6.5 करोड़ है जबकि गरीबी रेखा से ऊपर रहने वाले घर 11.5 करोड़ हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: वी कुमार

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