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दुनिया

गठबंधन को लेकर सोच में डूबी बीजेपी

बिहार में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन के बीच मतभेद खत्म नहीं हो पा रहे हैं. जेडीयू के साथ गठबंधन जारी रखा जाए या नहीं, इस पर बीजेपी कोई फैसला नहीं कर पाई है. बीजेपी ने फिर कहा है कि वह आत्म सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी.

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बिहार के गठबंधन को लेकर मंगलवार देर रात तक नई दिल्ली में बीजेपी के नेताओं की चर्चा चलती रही. लेकिन कोई हल नहीं निकला.बैठक के बाद बीजेपी के नेता शहनवाज हुसैन ने कहा कि पार्टी गठबंधन जारी रखना चाहती है लेकिन आत्म सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. जेडीयू और बीजेपी करीब 15 साल से साथ हैं.

माना जा रहा है कि बीजेपी आगे भी इस बारे में चर्चा करेगी. सुशील कुमार मोदी पार्टी की बैठक में हिस्सा लेने राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं. मंगलवार को उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी मुलाकात की है. उन्होंने बीजेपी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की. समझा जाता है कि उन्होंने बिहार में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन के बीच चल रहे विवाद से आडवाणी को अवगत कराया. मोदी के साथ बिहार के बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद भी थे.

Lal Krishna Advani bei einer Wahlkampfveranstaltung in Orissa

आडवाणी से मिले सुशील मोदी

पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे के साथ ही दोनों पार्टियों में कड़ुवाहट घुल गई है. मोदी ने बिहार के अखबारों में दो विज्ञापन दिए थे और दोनों पर ही विवाद उठ गया. पहले विज्ञापन में मोदी सरकार ने गुजरात की मुस्लिम महिलाओं की तरक्की पर इश्तेहार दिया था. बाद में पता लगा कि उसमें उत्तर प्रदेश की फर्जी तस्वीर लगाई गई थी.

दूसरे विज्ञापन में गुजरात की मोदी सरकार ने अपनी तारीफ करते हुए कहा था कि बिहार में बाढ़ के समय उन्होंने राज्य की सहायता की. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इससे भड़क गए और कहा कि किसी त्रासदी के वक्त सहायता करने के बाद इसका बखान करना अच्छी बात नहीं है. नीतीश इस कदर झल्लाए कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दी गई सहायता राशि के पांच करोड़ रुपये वापस कर दिए.

इन घटनाक्रमों के बाद बिहार में बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते में दरार पड़ गया. राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी की मुश्किल यह है कि वह आराम से जेडीयू से नाता भी नहीं तोड़ सकती क्योंकि बिहार में नीतीश सरकार के काम की तारीफ हो रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः महेश झा

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