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जर्मन चुनाव

ख्मेर रूज के सदस्यों को सज़ा की शुरूआत

कंबोडिया की संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली एक अदालत ने ख्मेर रूज के एक वरिष्ठ सदस्य को 35 साल के कैद की सज़ा सुनाई है. फैसला कंबोडिया को तबाह करने वाले किलिंग फील्ड्स क्रांति के 3 दशक बाद आया है.

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35 साल कैद

सजा पाए 67 साल के काइंग ग्वेक इएव डॉइक के नाम से मशहूर हैं और क्रांति से पहले एक स्कूल टीचर थे. डॉइक को हत्या, क्रूरता, बलात्कार, अमानवीय कृत्य और मानवता के खिलाफ अपराध करने के अलावा एक कारागार चलाने का दोषी करार दिया गया. डॉइक का ये कारागार 1975-79 के बीच उग्र कम्युनिस्टों की सत्ता के खौफ का प्रतीक बन गया था. उग्र कम्युनिस्टों के इस शासन के दौरान 17 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई. सरकारी वकीलों ने डॉइक के लिए 40 साल के कैद की सज़ा मांगी थी. हालांकि कंबोडियाई लोग उम्रकैद चाहते थे लेकिन अदालत ने 35 साल की ही सज़ा सुनाई.

Kambodscha Genozid Tribunal Kaing Guek Eav Duch

कम है सजा

कम्बोडिया के बर्बर शासन के पीड़ितों ने इस सज़ा को कम बताते हुए अपनी नाराज़गी जताई है. अदालत में सज़ा सुनाए जाते वक्त डॉइक के चेहरे पर कोई भाव नहीं था लेकिन लोग अदालत में ही गुस्से से चीख पड़े. 47 साल की होन्ग सोवाथ ने रोते हुए कहा, 'ये न्याय नहीं है, मैं डच के लिए उम्रकैद चाहती थी.' सोवाथ के पिता की इसी कारागार में हत्या की गई थी. इसी तरह खान मोनी ने कहा, 'कोर्ट का फैसला सही नहीं है. मैं बहुत निराश हुआ हूं. डॉइक ने बहुत से लोगों की हत्या की है अगर कोर्ट का फैसला सही होता तो कंबोडिया के लोग इसे शांति से स्वीकार कर लेते.' अदालत की इस ऐतिहासिक कार्रवाई का टीवी पर सीधा प्रसारण हुआ जिसे लाखों लोगों ने देखा. यहां तक कि सड़कों के किनारे और कैफे में भी बड़ी संख्या में लोग कोर्ट की कार्रवाई टीवी पर देख रहे थे. ख्मेर रूज के अत्याचार के खिलाफ लंबी खामोशी के बाद पहली बार कार्रवाई शुरू हुई है. कंबोडिया और संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से शुरू हुई अदालतें अत्याचार के मामलों की सुनवाई कर रही हैं.

डॉइक ने अदालत में 14000 से ज्यादा लोगों की हत्या और प्रताड़ना को नजरअंदाज किए जाने का आरोप स्वीकार किया है. तकनीकी कारणों से डॉइक को केवल 30 साल ही जेल में बिताने होंगे. डॉइक को कंबोडिया की सेना ने 1999 से 2007 के बीच अवैध रूप से गिरफ्त में रखा था इसलिए उसे जेल में पांच साल कम गुजारना होगा. कोर्ट का कहना है कि डच के बनाए तुओल स्लेंग नाम के इस कारागार में कम से कम 12,273 लोगों की हत्या हुई. डॉइक ने अपने एक हाई स्कूल को ही कारागार में तब्दील कर दिया था जो एस-21 के नाम से भी कुख्यात हुआ. कोर्ट का ये भी कहना है कि मरने वालों की तादाद 14000 तक जा सकती है.

Rote Khmer Kambodscha Flash-Galerie

खौफनाक ख्मेर रूज

डॉइक ने एस-21 के पीड़ितों के प्रति दुख जताया है. एस-21 के ज्यादातर पीड़ितों को जासूसी के आरोप मानने के लिए मजबूर किया गया और उसके बाद किलिंग फील्ड्स में ले जाकर उनकी हत्या कर दी गई. 1979 में वियतनाम के हस्तक्षेप के बाद इस क्रूर शासन का अंत हुआ. कई लोगों ने कोर्ट की कार्रवाई पर संतोष जाहिर किया है और उम्मीद जताई है कि देश में कानून का शासन अब काम करने लगा है इसका संदेश दुनिया तक पहुंचेगा. लोगों को ये भी उम्मीद है कि इस गरीब मुल्क की ओर दुनिया के निवेशकों का ध्यान जाएगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एन रंजन

संपादन: महेश झा

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