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ब्लॉग

खेल को कराना होगा सियासत के चंगुल से आजाद

किसी जमाने में तमाशा क्रिकेट यानी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के आयुक्त रहे ललित मोदी को लेकर उभरे ताजा विवाद ने एक बार फिर सियासत और खेलों के आपसी रिश्तों के बदसूरत चेहरे को उजागर कर दिया है.

विवाद की लपटें इतनी तेज हैं कि इससे राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कुर्सी खतरे में पड़ गई है. साथ ही इसकी आंच पर अब महामिहम प्रणब मुखर्जी तक पहुंचने लगी हैं. भारत में खेलों और राजनीति या राजनेताओं के आपसी रिश्ते बेहद गहरे रहे हैं. जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर सत्ता में रहने वाली राजनीतिक पार्टियां तमाम खेल संगठनों पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती हैं. खेल संगठनों पर कब्जे की होड़ में कांग्रेस, भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे परस्पर विरोधी दल भी आपस में तालमेल बना लेते हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के दुनिया का सबसे धनी और ताकतवर बोर्ड होने के नाते इस पर कब्जे की होड़ कुछ ज्यादा ही रही है. बरसों तक श्रीनिवासन के रूप में दक्षिण लाबी इस पर हाबी रही तो उससे पहले पवार एंड कंपनी का इस पर बर्चस्व रहा. कब्जे की इस होड़ में राजनेताओं को उद्योगपतियों का भी समर्थन हासिल रहा है. खासकर आईपीएल तो पूरा पैसे और सट्टे का ही खेल है. कुछ साल पहले इसमें सट्टेबाजी के खुलासे ने जहां देश-विदेश में सुर्खियां बटोरी थीं, वहीं इसके ताकतवर प्रशासक ललित मोदी को रातोंरात देश छोड़ कर ब्रिटेन भागने पर मजबूर होना पड़ा था.

महज पांच-छह साल के अरसे में एक ताकतवर क्रिकेट प्रशासक के तौर पर मोदी के उभरने में उद्योग घरानों के अलावा कांग्रेस, भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं का भी हाथ था. अब मोदी के देश छोड़ने के कोई पांच साल जब इस रहस्य की परतें धीरे-धीरे उघड़ रही हैं तो कई जगह सत्ता हिलने लगी है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से मोदी को कथित मानवीय आधार पर यात्रा दस्तावेज हासिल करने में सहायता की बात सामने आने के बाद ही लगभग रोजाना इस विवाद के पिटारे से नई-नई बातें सामने आ रही हैं. भाजपा और उसकी अगुवाई वाली केंद्र सरकार अभी सुषमा का पूरी तरह बचाव कर भी नहीं पाई थी कि राजस्थान की मुख्यमंत्री व भाजपा नेता वसुंधरा राजे के मोदी के रिश्तों की कहानी सामने आ गई. इसके बाद विपक्षी दलों ने जहां सुषमा व वसुंधरा के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है वहीं भाजपा के लिए अब वसुंधरा को बचाना मुश्किल साबित हो रहा है. पार्टी ने उनको खुद ही अपना बचाव करने को कह कर पल्ला झाड़ लिया है. इसके साथ यह भी सामने आया है कि मोदी ने वसुंधरा के बेटे की कंपनी में करोड़ों निवेश किए थे और उनको कर्ज के तौर पर मोटी रकम दी थी.

अब मोदी ने इस विवाद के सामने आने के बाद एक भारतीय टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कई और बातों का खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री रहते उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे. इसी तरह यूपीए सरकार में गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने उनके ब्रिटेन में रहने के प्रयासों में बाधा पहुंचाई थी. मोदी का कहना है कि आईपीएल में कोच्चि टीम के मालिकाना हक को लेकर उभरे विवाद के बाद शशि थरूर को मंत्री पद से हटाए जाने की वजह से ही कांग्रेस उनसे नाराज थी.

आईपीएल की वैधता और इसके आयोजन के तरीकों पर शुरू से ही विवाद रहे हैं. मोदी ने ही अपनी पहल और नेताओं के सहयोग से फिल्मी सितारों से लेकर उद्योगपतियों तक को इस तमाशे के साथ जोड़ा. लेकिन शुरू होने के तीसरे साल में ही इसका भांडा फूट गया और मोदी को देश छोड़ना पड़ा. मोदी के मुताबिक, शरद पवार के अलावा कांग्रेस के कई नेताओं ने भी उनकी सहायता की थी. इससे साफ है कि हम्माम में सब नंगे हैं. खेलों में बेशुमार पैसों और सियासत पर पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए राजनेताओं में इन संगठनों पर कब्जे की होड़ लगी रहती है. खेल संगठनों को सियासत के चंगुल से मुक्त कराए बिना समय-समय पर ऐसे विवाद सामने आते ही रहेंगे. लेकिन सवाल यह है कि इसकी पहल कौन करेगा. तमाम प्रमुख दलों के नेता इस खेल में शामिल हैं. ऐसे में खेलों के दामन पर लगने वाला यह बदबूदार दाग साफ होने के आसार कम ही हैं.

ब्लॉग: प्रभाकर

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