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वर्ल्ड कप

खेलगांव में हिट हो रही है खादी

दिल्ली के कॉमनवेल्थ खेलों में बेशक सबकी नजरें पदकों पर हों, लेकिन वहां भी कुछ विशुद्ध भारतीय चीजें खासी लोकप्रिय हो रही हैं. इनमें सबसे ऊपर है खादी, साड़ियां और आदिवासी की रंग बिरंगी बनाई चीजें.

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वैसे खेलगांव में इन चीजें के लोकप्रिय होने का श्रेय काफी हद तक कॉमनवेल्थ खेलों के उद्घाटन समारोह को भी जाता है जिसमें भारतीय संस्कृति के रंगों को बखूबी दिखाया गया. खादी और आदिवासियों की बनाई चीजों की ब्रिकी के लिए खेलगांव में खास स्टोर बनाए गए हैं. विदेशी खिलाड़ी भारत की यादगार चीजें अपने साथ ले जाने के लिए वहां अपनी जेबें ढीली कर रहे हैं.

आदिवासी मंत्रालय की पहल पर खेलगांव में बनाए गए ट्राइब इंडिया के स्टोर की मैनेजर ममता शर्मा कहती हैं, "हमारी बिक्री बढ़ रही है. एक दिन तो हमने दिन भर में 57 हजार की ब्रिकी की. वैसे हर रोज 40 से 45 हजार की ब्रिकी हो रही है." ट्राइब इंडिया के इस स्टोर में कश्मीरी शॉल, अंगूरी शॉल, पेंटिंग्स, दरवाजों पर लटकाने वाले बंदनवार और देश के अलग अलग हिस्सों से लाई गईं दूसरी पारंपरिक चीजें बेची जा रही हैं.

ममता शर्मा का कहना है, "ब्रिकी इस कदर हो रही है कि हमें दिल्ली में अपने दो दूसरे स्टोरों का सामान भी यहां लाना पड़ा है." गुजरात से बन कर आए बंदनवार की कीमत 135 से 185 रुपये के बीच है. इन्हें सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी खरीद रहे हैं. ममता शर्मा का कहना है, "वे लोग एक या दो नहीं, बल्कि इक्कट्ठे बंदनवार खरीद रहे हैं."

ऐसी ही स्थिति खादी के स्टोर में भी है जो खेलगांव में ट्राइब इंडिया के स्टोर के पास ही बनाया गया है. इस स्टोर पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया, "बहुत से विदेशी खिलाड़ी यहां खरीदारी के लिए आ रहे हैं. दो अक्टूबर को जब यह स्टोर खुला तो शुरू में कम लोग आए. लेकिन अब बिक्री बढ़ गई है. हम लगभग 25 हजार की ब्रिकी रोज कर रहे हैं." खिलाड़ी खादी के सामानों के अलावा लकड़ी और लोहे से बनी चीजें भी खरीद रहे हैं.

ममता शर्मा के मुताबिक सबसे दिलचस्प बात यह है कि विदेशी महिला खिलाड़ियों को साड़ियां सबसे ज्यादा अपनी ओर खींच रही हैं. वह बताती है, "कई ऑस्ट्रेलियाई और कनाडाई खिलाड़ियों को हमने यह भी सिखाया है कि साड़ी को कैसे पहनना है." कई पाकिस्तानी खिलाड़ी भी उनके स्टोर पर साड़ी खरीद रही हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एन रंजन

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