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मनोरंजन

खूब बैटरी खाता है फेसबुक

फेसबुक का चस्का ऐसा है कि सुबह आंख खुलने से ले कर रात को नींद आने तक लोग स्मार्टफोन के साथ फेसबुक से जुड़े रहते हैं. लेकिन फेसबुक के एक नए फीचर ने लोगों को परेशान किया हुआ है.

फेसबुक आए दिन अपने लुक में बदलाव लाता रहता है. अक्सर लोगों को इन बदलावों से परेशानी होती है लेकिन बाद में वे इन्हें पसंद करने लगते हैं. इन दिनों फेसबुक ने अपनी साइट की सेटिंग्स को कुछ इस तरह से बदल दिया है कि वॉल पर पोस्ट किए गए वीडियो पेज स्क्रॉल करने पर अपने आप ही चलने लगते हैं. लोगों को प्ले का बटन दबाने की भी जरूरत नहीं. हालांकि वीडियो बिना आवाज के चलते हैं ताकि अचानक ही आसपास वाले हैरान ना हो जाएं. अगर वीडियो के साथ ऑडियो भी चाहिए तो क्लिक कर के आवाज सुनी जा सकती है.

महंगा पड़ा फेसबुक

लेकिन इस ऑटोमैटिक वीडियो फीचर ने लोगों को परेशान किया हुआ है. अधिकतर लोग अपने स्मार्टफोन पर फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं. और इस तरह से लगातार वीडियो चलते रहने से उनके फोन की बैटरी भी खूब खर्च होती है और इंटरनेट भी. ऐसे में फेसबुक इस्तेमाल करना उन्हें महंगा पड़ रहा है. जर्मनी की कंप्यूटर मैगजीन 'कंप्यूटरबिल्ड' ने इस समस्या को समझने की कोशिश की तो पाया कि इससे पूरी तरह से छुटकारा पाना तो मुमकिन नहीं है. लेकिन स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जा कर ऐसा किया जा सकता है कि वीडियो तभी चले जब फोन वाई फाई से जुड़ा हो. ऐसे में बैटरी ना सही, तो कम से कम इंटरनेट खर्च होने से बचा जा सकता है.

इन दिनों अधिकतर कंपनियां 3जी पैकेट दे रही हैं जिसमें इंटरनेट काफी अच्छी स्पीड पर चलता है. लेकिन जिन लोगों के पास अभी भी 2जी है उनके लिए सोच समझ कर इंटरनेट इस्तेमाल करना जरूरी है. वहीं जो लोग लैपटॉप या कंप्यूटर पर फेसबुक का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे इस ऑटोमैटिक फीचर को पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं. हालांकि कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले इस फीचर की उतनी शिकायत नहीं कर रहे जितना कि स्मार्टफोन वाले.

फोन का ऑटो पायलट

फेसबुक के अलावा कई ऐप भी स्मार्टफोन को ऑटोमैटिक की तरफ ले जा रहे हैं. एक नया ऐप 'आईएफटीटीटी' फोन को ऑटो पायलट पर डालने की क्षमता रखता है. मिसाल के तौर पर यह 'इंस्टाग्राम' पर अपलोड की गयी नई तस्वीर को खुद ही फोन का बैकग्राउंड बना देता है. इसके अलावा यह अपने आप ही फोन का बैकअप भी लेता रहता है. ऐप पूरे के पूरे 'कॉल लॉग' को गूगल ड्राइव पर सेव कर देता है.

इसी तरह से यह मौसम के बारे में भी जानकारी देता रहता है. अगर बारिश होने वाली हो, तो यह ईमेल के जरिए चेतावनी भेज देता है. यह ऐप एप्पल और एंड्रॉइड दोनों के लिए बना है और इसे मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है. इस्तेमाल करने के लिए अपने ईमेल आईडी से लॉगिन करना जरूरी है. लेकिन बाकी की ऐप्स की तरह इसमें भी यह खतरा है कि इससे जुड़ कर यूजर अपनी पूरी जानकारी इस सॉफ्टवेयर से बांट रहे हैं. फोन के ऑटो पायलट पर चले जाने का मतलब है कि आपके ईमेल समेत हर तरह के डाटा पर ऐप का कंट्रोल है.

आईबी/एएम (डीपीए)

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