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विज्ञान

खून ठंडा तो उम्र लंबी

सौ साल तक जीने की कल्पना बहुत लोग करते हैं, पर पूरी कुछ ही की हो पाती है. अब लंबी उम्र का राज पता चल रहा है. इसके लिए खून का ठंडा होना जरूरी है

मिशिगन यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि लम्बी उम्र का खून के तापमान से लेना देना है. जानवरों पर किए गए शोध से उन्होंने पता लगाया है कि शरीर का तापमान कम होने से उम्र बढ़ती है. हालांकि यह बात पहले भी कई बार कही जा चुकी है, लेकिन इसकी वजह का कुछ पता नहीं था. वैज्ञानिकों को लगता था कि कम तापमान में शरीर के अंदर कुछ केमिकल प्रतिक्रियाएं रुक जाती हैं या धीमी हो जाती हैं. इन्हीं के कारण बूढ़े होने की गति भी कम हो जाती है और लोग लंबा जी पाते हैं.

लेकिन अब पता चला है कि उम्र का राज केमिकल में नहीं, बल्कि डीएनए में है. रिसर्च टीम के शॉन सू बताते हैं, "अब कम से कम केंचुओं को देख कर तो यही पता चलता है कि यह जीन में चल रही एक सक्रिय क्रिया के कारण है. आप इसे सिर्फ केमिकल रिएक्शन के धीरे होने से नहीं समझा सकते." सू का कहना है की यही प्रक्रिया इंसानों में भी होती है. उन्होंने बताया कि ठंडी हवा के कारण टीआरपीए1 नाम का एक रिसेप्टर सक्रिय हो जाता है. टीआरपीए1 नसों और चर्बी की कोशिकाओं में पाया जाता है. सक्रिय होने के बाद यह कोशिकाओं में कैल्शियम भेजने लगता है. इसके बाद वे कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं जो लम्बी उम्र के लिए जिम्मेदार हैं.

शोध में देखा गया कि जिन केंचुओं में टीआरपीए1 नहीं था उनकी मृत्यु जल्दी हो गयी. सू ने कहा, "इस से हम यह समझ सकते हैं कि ठंडी हवा के साथ संपर्क में रहने से जानवरों की उम्र बढ़ती है." शायद इस से यह भी समझा जा सकता है कि पश्चिमी सर्द देशों में रहने वाले लोगों की औसतन उम्र पूर्वी देशों में रहने वालों की तुलना में ज्यादा क्यों होती है. कुछ वक्त पहले शोधकर्ताओं ने चूहों पर टेस्ट कर यह भी पाया था कि यदि उनके शरीर का तापमान 0.5 डिग्री कम कर दिया जाए तो उनकी उम्र में 20 फीसदी का इजाफा होता है. इंसानों के साथ यह करना अब तक मुमकिन नहीं है.

इसके साथ साथ इस नए शोध में जापान में इस्तेमाल होने वाली जड़ीबूटी वासाबी के प्रयोग के बारे में भी बात की गई है. केंचुओं को जब वासाबी दी गयी तो उस से उनके शरीर में टीआरपीए1 की मात्रा बढ़ गयी और वे सामान्य से ज्यादा समय जीवित रहे. वासाबी जापान के पारंपरिक व्यंजन सूशी के साथ हरी चटनी की तरह खाई जाती है. हालांकि यह इतनी तीखी होती है कि इसे अचार से भी कम मात्रा में लगाया जाता है. उम्र बढे ना बढे, पर सू इस बारे में मजाक करते हुए कहते हैं, "शायद हम सब को अब सूशी रेस्तरां ज्यादा जाना चाहिए."

आईबी/एएम (डीपीए)

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