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विज्ञान

खून की जांच से छह सौ बीमारियों का पर्दाफाश

ये बीमारियां आपके दादा परदादा के जीन्स में कहीं छुपी होती है और अचानक से घर का कोई बच्चा ऐसी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है जिसे पिछले पचास साल में परिवार में किसी ने नहीं देखा. यह कहलाते हैं कमज़ोर आनुवंशिक रोग.

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यह बीमारियां ऐसे जीन्स के कारण होती हैं जो माता पिता में छिपे रहते हैं लेकिन बच्चे में प्रभावशाली बन जाते हैं. ऐसी ही बीमारियों का पता लगाने के लिए अमेरिका में एक नई ब्लड टेस्ट यानी रक्त परीक्षण शुरू किया गया है. बस एक बार खून की जांच करवाइए और 600 आनुवांशिक बीमारियों के जीन्स का पर्दा खुल जाता है. डॉक्टर स्टेफन किंग्समोर अमेरिका के कैन्सास सिटी में मर्सी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में काम करते हैं और आनुवंशिक बीमारियों के विशेषज्ञ हैं. वे कहते हैं, "हमने एक सौ चार लोगों की जांच की. इनमें से अधिकतर को पहले से पता था कि वे किसी आनुवांशिक बीमारी के धारक हैं. लेकिन हमें पता लगाना था कि टेस्ट काम करती है या नहीं. और यह टेस्ट सफल रही. वह भी 99.98 फीसदी के नतीजे के साथ."

बेन्सन की बीमारी

इस टेस्ट की कहानी शुरू होती है क्रिस्टियाने बेन्सन से. एक प्यारी सी नीली आंखों वाली लड़की. जिसकी आंखे हैं तो बहुत सुंदर लेकिन वह देख नहीं सकती. उसे एक बहुत कम होने वाली आनुवंशिक बीमारी है जिसे बैटन डीज़ीज़ या वीएसएस कहा जाता है. एक ऐसी बीमारी जो अनजाने में उसे मिली और डर था कि इस कारण वह शायद अपने जीवन का उन्नीसवां वसंत भी न देख पाए. यह अप्रभावशाली जीन के कारण होने वाली बीमारी है.

Pressebilder Synthetische Biologie Flash-Galerie

जीन्स में छोटा सी अनियमितता भी भारी

मनुष्य के शरीर में दो तरह के जीन्स होते हैं एक प्रभावी और एक अप्रभावी. अगर अप्रभावी और बीमारी वाला जीन्स माता और पिता दोनों में हो तो बच्चे में यह जीन प्रभावी बन जाता है. फिर सामने आती हैं बीमारियां. बड़ी गंभीर और अजीब तरह की. ऐसी ही अजीबो गरीब घातक बीमारियों का समय से पता लगाने के लिए यह खून की जांच की जाएगी. लेकिन छह सौ आनुवांशिक बीमारियों का पता लगाने वाले इस टेस्ट से सहूलियत के साथ ही मुश्किलें भी खड़ी होंगी. बॉन युनिवर्सिटी में ह्युमन जेनेटिक्स के प्रोफेसर पीटर प्रोपिंग कहते हैं, "अगर पति और पत्नी दोनों ही म्यूटेशन के कारण होने वाली आनुवंशिक बीमारियों को अपने जीन्स में लिए हैं तो इनमें से एक बीमारी बच्चे को होने की आशंका पच्चीस फीसदी है. वह या तो फैसला कर सकते हैं कि परिवार में बच्चे ही न हों. या फिर वह जोखिम मोल लें और बच्चे की जांच गर्भावस्था के दौरान ही कर लें और अगर कोई बहुत गंभीर बीमारी हो तो मां गर्भपात भी करवा सकती हैं." दंपत्ति को बहुत अप्रिय और गंभीर फैसले लेने पड़ सकते हैं.

हालांकि क्रिस्टियाने जैसी लड़की के माता पिता निश्चित ही चाहते होंगे कि ऐसी बीमारियों का पहले पता चल जाए ताकि इलाज किया जा सके. आनुवंशिक बीमारियों के विशेषज्ञ स्टेफन किंग्समोर मानते हैं कि यह टेस्ट करवाना या नहीं यह तो पूरी तरह से दंपत्ति पर निर्भर करेगा. लेकिन गंभीर बीमारियों का समय पर पता लगाने में यह टेस्ट खासी भूमिका निभा सकती है.

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